गोवा: मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेते वक्‍त मनोहर पर्रिकर से हो गई बड़ी भूल Goa: Manohar Parrikar gets big mistake while taking oath as Chief Minister



समर्थन देने वाले 8 में से 7 विधायकों को बनाया मंत्री
इस चुनाव में कांग्रेस को 17 और बीजेपी को 13 सीटें मिली थीं। 11 मार्च को नतीजे आने के बाद राज्य में छोटे दलों से बातचीत कर सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई थी
पणजी ( न्यूज नेटवर्क ) मनोहर पर्रिकर  ने  गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। लेकिन शपथ के दौरान बोलने में गलती होने के कारण पर्रिकर को दूसरी बाद गवर्नर ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पर्रिकर ने पहले मंत्री पद की शपथ ले ली थी, इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। पर्रिकर चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री बने हैं। उनके साथ उनके कई मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी शपथ ली है। गोवा में त्रिशंकु विधानसभा के बाद बीजेपी ने अन्य दलों की मदद से सरकार बनाने का दावा पेश किया था। यूं तो कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा सीटें मिली थीं, लेकिन फिर भी वह सरकार बनाने का मौका चूक गई। इस चुनाव में कांग्रेस को 17 और बीजेपी को 13 सीटें मिली थीं। 11 मार्च को नतीजे आने के बाद राज्य में छोटे दलों से बातचीत कर सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई थी, लेकिन बीजेपी ने इसमें भी कांग्रेस से बाजी मार ली। बीजेपी ने एमजीपी जीएफपी और निर्दलीय उम्मीदवार की मदद से सरकार बनाई है। बीजेपी को समर्थन देने वाले 8 में से 7 विधायकों को मंत्री पद दिया गया है।
भले ही इस चुनाव को बीजेपी बनाम कांग्रेस बताया जा रहा हो, लेकिन असल में पर्दे के पीछे परीक्षा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की थी। दोनों ही अपनी पार्टियों की ओर से गोवा के प्रभारी बनाए गए थे। दरअसल रविवार की रात मनोहर पर्रिकर और बीजेपी के गोवा प्रभारी नितिन गडकरी एक फाइव स्टार होटल में थे। उनके पास एमजीपी का समर्थन तो था, लेकिन अब तक गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने हां नहीं की थी। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक तभी एंट्री होती है विजाई सरदेसाई (पत्रकार राजदीप सरदेसाई के कजिन ) की, जो गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनके आते ही पूरा खेल बीजेपी के पाले में आ जाता है। बता दें कि पर्रिकर कई बार सरदेसाई की खुलेआम आलोचना कर उन्हें एक पॉलिटिकल फिक्सर बता चुके हैं।
वहीं दूसरी ओर एक अन्य फाइव स्टार होटल में कांग्रेस इस बात पर मत्थापच्ची कर रही थी कि किसी मुख्यमंत्री चुना जाए। कांग्रेस ने 5 घंटे इस पर बहस की कि क्या राज्य अध्यक्ष लुइजिन्हो फालेरो, पूर्व मुख्यमंत्री दिगम्बर कामत और प्रताप सिंह राणे को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए, लेकिन तीनों ने ही एक दूसरे को रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद निराश कांग्रेसी नेता होटल के बाहर आने पर आलाकमान पर राज्य में सरकार बनाने का मौका गंवाने का आरोप लगाते हैं। जब यह खबर आती है कि गडकरी और अन्य विधायक सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल से मिलने पहुंचे हैं, तो कांग्रेस पार्टी हड़बड़ाहट में तीन बार विधायक रहे चंद्रकांत कावलेकर को सीएम पद का दावेदार चुन लेती है, जिससे सब हैरान हो जाते हैं।
दिग्विजय सिंह जो गोवा के प्रभारी भी हैं, राज्य में सरकार बनाने का मौका गंवाने की बात स्वीकार कर लेते हैं और निर्दलीय उम्मीदवार रोहन खौंटे और सरदेसाई पर धोखा देने का आरोप लगाते हैं। सूत्र बताते हैं कि शनिवार को जब पूरे नतीजे आ गए थे तो दिग्विजय सिंह ने सरदेसाई से मुलाकात की थी, जिन्होंने कांग्रेस को समर्थन देने का भरोसा दिलाया था। वहीं शनिवार रात को ही गडकरी गोवा पहुंचते हैं। पहले वह एमजीपी को समर्थन के लिए राजी करते हैं। इसके बाद सरदेसाई से बातचीत का दौर चलता है, लेकिन वह नाखुश होकर चले जाते हैं। अगली सुबह सरदेसाई गडकरी को फाइव स्टार होटल में आने को कहते हैं, जहां दोनों के बीच एक डील होती है, जिसमें तय होता है कि कैबिनेट में जीएफपी के तीन मंत्री होंगे। इस तरह दिग्विजय के हाथों से गडकरी गोवा में सरकार बनाने का मौका छीन लेते हैं।




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