डीयू कुलपति से मुलाकात न होने पर छात्रों ने फूँका पुतला Students not to meet DU Vice-Chancellor



  • एसओएल छात्रों ने लेट रिज़ल्ट, अधूरे सिलेबस की समस्या को लेकर किया डीयू कुलपति कार्यालय का किया घेराव
  • छात्रों के प्रदर्शन के दबाव में डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर ने लिया ज्ञापन



नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  आज, भारी संख्या में डीयू के मुक्त शिक्षा विद्यालय (एसओएल) के छात्रों ने क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के बैनर तले अपनी समस्याओं को लेकर डीयू कुलपति कार्यालय का घेराव किया| आक्रोशित छात्रों ने कुलपति से मुलाकात न होने पर पुतला फूँका| भारी दबाव के कारण डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर ने छात्रों के समक्ष आकर उनका ज्ञापन लिया और उनकी मांगों पर जल्द कारवाई करने का आश्वासन दिया| ज्ञात हो कि एसओएल छात्रों की क्लास खत्म हो चुकी हैं, मगर सिलेबस अभी आधा भी नही पढ़ाया गया है| साथ ही, छात्रों को दी गयी अध्ययन सामग्री भी नाकाफी और पुरानी है, जिसको पढ़कर पूरा सिलेबस नहीं तैयार किया जा सकता है| इस कारण ज्यादातर छात्रों के फेल करने का एसओएल और डीयू प्रशासन द्वारा इंतज़ाम किया जा  रहा है|

इसके अतिरिक्त एसओएल में सभी कोर्स के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों के परीक्षा परिणाम समय पर निर्धारित नही किये जाते है| स्तिथि यह है की छात्रों का रिजल्ट उस समय पर आता है जब सभी कालेजों, सरकारी संस्थानों में प्रवेश प्रकिया खत्म हो जाती है| इस कारण हजारों की संख्या में तृतीय वर्ष के छात्रों का कीमती एक वर्ष ख़राब हो जाता है| ज्ञात हो कि रेगुलर छात्रों का परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किया जाता है, जिससे उन्हें डीयू एवं अन्य विश्वविद्यालयों में एडमिशन लेने में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है, परन्तु परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद समय पर न घोषित किये जाने से एसओएल छात्रों का रेगुलर कोर्सों में तो एडमिशन होता नहीं, उसके अतिरिक्त एसओएल में भी तिथि बीत जाने के कारण उन्हें एसओएल में भी एडमिशन नहीं मिलता| एक ही विश्वविद्यालय विभाग द्वारा करायी गयी रेगुलर और कॉरेस्पोंडेंस की परीक्षा का परिणाम घोषित करने में भी असमानता किये जाने से प्रत्येक वर्ष हजारों छात्र आगे पढ़ने के अपने सपने से वंचित रह जाते हैं|

ज्ञात हो कि एसओएल सेंटरों पर यौन-शोषण रोकथाम कमिटी और आंतरिक शिकायत कमिटी नहीं होने से छात्राओं को बदतमीजी, छेड़-छाड़ झेलने पर कहीं भी उसपर कारवाई किये जाने की व्यवस्था नहीं है| इस वर्ष इसी कारण एक एसओएल छात्रा ने अपनी शिकायत का निवारण न होने के कारण अवसाद-ग्रसित होकर आत्म-हत्या कर ली| इस विषय पर पिछले वर्षों विश्वविद्यालय और एसओएल प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद भी सेंटरों पर यौन-शोषण रोकथाम कमिटियों का गठन किया नहीं गया है| महोदय, यह यौन-शोषण रोकथाम कानून, 2013 और यूजीसी की 2 मई, 2016 की अधिसूचना का भी उल्लंघन है|

डीयू कुलपति को संबोधित ज्ञापन में छात्रों का समय पर परीक्षा परिणाम घोषित किये जाने, उनको पूरे कोर्स से सम्बंधित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाने, एसओएल सेंटरों पर तुरंत यौन-शोषण रोकथाम कमेटियों और आंतरिक शिकायत कमेटियों का गठन किया जाने की मागों को उठाया गया| केवाईएस इन मांगों के जल्द पूरा नहीं किये जाने पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर अपनी मांगों को लेकर जाएगा|





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