भक्त और धर्म की रक्षा के लिये लेते हैं भगवान अवतार God protects the devotee and religion



वसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता )  वसुंधरा में चल रही भागवत कथा के एक प्रसंग के दौरान कथा व्यास ने कहा कि  सत्पुरुषों,भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिये ही भगवन स्वयं  धरती पर अवतारित  होते हैं।     .      
मंगलबार को याज्ञिक जी महराज ने एक प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि परमात्मा के अव तक हुए 23 अवतार हुए हैं। उन्होंने कहा कि भागवत  कथा  श्रवण मात्र से ही आत्म शुद्धि  होती है। 

अजामिल  प्रसंग समझाते हुए व्यास जी ने बताया अंत  समय में केवल नारायण नाम स्मरण से मोक्ष की प्रप्ति  हो जाती  है। भगवान कपिल महाराज ने अपनी माता जी को ज्ञान और अष्टांग  योग का  मार्ग दर्शन समझाया । इसी संदर्भ में वर्तमान समाज में फैली विभिन्न  कुरीतियों  और अनाचार धर्म के नाम पर पाखंड  की ओर  भी संकेत किया। पितृ पक्ष में हो रही कथा  में महाराज जी ने बताया कि  अपने पूर्वजों और पितरों के प्रति श्राध, तर्पण से वंश  वृद्धि होती है तथा परिवार  में खुशहाली  और  शांति स्थापित  रहती  है । अतः  हमे आपने माता पिता  और वृद्ध  जनो का सदा सम्मान करना चाहिये । 

श्री  याज्ञिक  जी महराज  ने समझया कि जड़भरत  के चरित्र से अनाषक्ति  और महाराज उत्तानपाद  के चरित्र से निष्काम सेवा की  प्रेरणा  लेनी चाहिये क्योंकि  निष्काम  सेवा  ही उन्नति  का साधन है। प्रातः काल के सत्र में  लखनऊ  से पधारे  विद्वान आचार्यों  ने  वैदिक मँत्रों के साथ पितृ तर्पण  करवाया। इस अवसर पर  पीडी  मलिक,सत्यपाल  गुप्ता, सीपी  शर्मा, सुरेशचंद  शर्मा,अनिता शर्मा, केपी मिश्र,निशा शर्मा आदि  सैकड़ो श्रोताओं  ने  दिव्य  कथा में भाग लिया।



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