पुत्र की लंबी आयु को आज माताएं करेंगी जिउतिया व्रत Jyotiatia fasted to mother's son today



गोपालगंज,   माताएं अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए बुधवार को जीवितपुत्रिका(जिउतिया) व्रत रखेंगी। माताएं 24 घंटे तक निर्जला व्रत रखकर आराधना करेंगी। मंगलवार को इसके लिए नहाय-खाय की विधि माताओं ने की। स्नान के लिए गंडक, दाहा नदियों के साथ विभिन्न जलाशयों के पास महिलाएं पहुंचीं। वहीं, कई महिलाओं ने घर पर ही स्नान-ध्यान किया। व्रत को लेकर माताओं ने तैयारी पूरी कर ली है और जरूरी पूजन सामग्री की व्यवस्था भी कर ली है। घरों में विशेष साफ-सफाई की गई है। पवित्रता का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। बुधवार को महिलाएं पूजा-अर्चना करने के साथ ही जीवितपुत्रिका व्रत की कथा भी पंडितों से सुनेंगी। ---------------------- व्रत को लेकर की खरीदारी शहर के बाजारों में जिउतिया व्रत को लेकर मंगलवार को महिलाओं व उनके परिजनों ने खरीदारी की। मालूम हो कि महिलाएं इस व्रत को रखने के साथ ही गले में जिउतिया को धारण करती हैं। यह रंग- बिरंगे धागे का बना होता है। अब तो डिजाइनदार जिउतिया की बिक्री होने लगी है। यही नहीं कई महिलाएं चांदी के साथ बने जिउतिया को भी धारण करती हैं। इसकी खरीदारी भी सोने- चांदी की दुकानों से की गई। इसको खरीदने के बाद महिलाएं जिसको जितने पुत्र होते हैं , उतनी गांठ बांधती हैं। मंगलवार को जिउतिया धागा की खरीदारी करने के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। उधर तरोई, नोनी का साग व दही की भी खरीदारी महिलाओं व लोगों ने की। आम दिनों की अपेक्षा ये चीजें दोगुने-तिगुने दामों में बिकीं। मान्यता है कि नहाय-खाय के रोज रात में भोजन करने के बाद पितरों को भी तरोई के पत्ते पर दान दिया जाता है। --------------------- क्या है जिउतिया की कथा : कहावत है कि सतयुग में सत्यवचन बोलने वाले और सत्यचरण करने वाले एक समदर्शी राजा हुआ करते थे। इनका नाम जीमूतवाहन था। एक बार वे अपनी पत्नी के साथ ससुराल गए और रात्रि में वहीं ठहर गये। आधी रात को जब राजा सोये हुए थे तो एक महिला जो पुत्र के शोक में व्याकुल थी ,उसके रोने की आवाज सुनाई दी। इस पर राजा उस महिला के पास गए और रोने का कारण पूछा। महिला ने बताया कि एक गरूड़ प्रतिदिन उसके गांव में आता है और मांस के रूप में एक लड़के का भोजन करता है। गांव के लोग प्रतिदिन एक-एक लड़का गरूड़ को खाने के लिए देते हैं। आज मेरे पुत्र की बारी है। राजा जीमूतवाहन ने उस मां को दिलासा दिलाई कि आज उसके पुत्र को कुछ नहीं होगा। आज वे गरूड़ का आहार बनेंगे। इसके बाद राजा उस स्थान पर चले गये जहां गरूड़ आता था। जब गरूड़ आया तो उनके शरीर का बायां अंग खाने लगा। बायां अंग खत्म होने के बाद राजा ने अपना दायां अंग गरूड़ के सामने खाने के लिए स्वयं रख दिया। यह देखकर गरूड़ महाराज को आश्चर्य हुआ और व प्रसन्न होकर राजा से वर मांगने के लिए कहा। इसपर राजा ने कहा कि आज तक आपने जिसे मारा है वे जीवित हो जाएं और आप कभी किसी का बच्चा नहीं खाएं। इस पर गरूड़ महाराज तुरंत नागलोक गए और अमृत लाकर मृत लोगों की हड्डियों पर बरसाये। इससे सभी लोग जीवित हो गये। गरूड़ महाराज ने कहा कि हे राजन, जो महिला जीवित पुत्रिका और कुश की आकृति बनाकर तुम्हारी पूजा करेगी तो दिनों-दिन उसका सौभाग्य बढ़ेगा और वंश की भी बढ़ोतरी होगी। सप्तमी से रहित और उदयातिथि की अष्टमी को महिलाएं व्रत करें। शुद्ध अष्टमी को व्रत करें और नवमी में पारण करें। यदि इसपर ध्यान न दिया गया तो फल नष्ट हो जाएगा और इसका कुप्रभाव पड़ सकता है। यह कह गरूड़ महाराज बैकुंठधाम चले गये।



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