व्यंग्य - प्रभुता पाइ काहिं मद नाहि .....................! Satire - There is no item in authority .....................!



                                                                  खुल्लम - खुला

                                                                          संजय त्रिपाठी

आज सुबह - सुबह धर्मदास ठेकेदार जी कुछ उखड़े - उखडें से लग रहे थे । उन्हें देखते ही मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि बुढ़ापा में आखिर क्यों इतना उखड़ रहे हैं ? कहीं ब्लड प्रेसर बढ़ गया तब क्या होगा, लेने के देने पड़ जायेंगे । मिलते ही राम - दुआ के बाद मैने उनके उखड़ने का कारण पूछा तो मुझपर ही ऐसे पिल पड़े जैसे सारा फसाद का जड़ मैं ही हूॅं । मैने पूछा आखिर बात क्या है ? मुझे भी तो कुछ बताइए, मैं दोषी हूं या कोई और है । गुस्से में ही उन्होंने कहा - क्या बताऊं ? एक तरफ मोदी जी भ्रष्आचार को दूर करने के लिए जी - तोड़ मेहनत कर रहे हैं, करें भी क्यों न ? भ्रष्टाचार के मुद्दे को ही भुना कर सरकार जो बनाये है। यूपीए सरकार में काॅमनवेल्थ गेम्स, कोयला, टू जी, ए जी, ओ जी जैसे कई घोटालों की बाढ़ आ गई  थी । उस दौरान कांग्रेस की थू - थू हो रही थी। लोगों में कांग्रेस सरकार को बदलने की छटपटाहट साफ दिखाई दे रही थी, और लोगों ने कांग्रेस को बदल कर भाजपा को शासन में लाया और मोदी को प्रधानमंत्री बनाया । आज मोदी स्वच्छ भारत मिशन और भ्रष्टाचार का समापन दो मुद्दा को लेकर प्रमुखता से चल रहे है। मोदी भक्त इनकी प्रशंसा करते - करते लोगों से जहां - तहां झगड़ते भी दिखाई दे जाते हैं । लेकिन अब इसका क्या किया जाय जब उनके अपने ही उनके मिशन को समाप्त करने पर तुले हैं । नगर निकाय चुनाव में गाजियाबाद जिला प्रदेश में सुर्खियों पर हैं । एक तरफ मोदी भ्रष्टाचार को समाप्त करने का राग अलाप रहे है तो दूसरी तरफ गाजियाबाद में भाजपा के नेता और पदाधिकारी टिकट बेच कर मालदार बन रहे हैं । आप ही बताओं क्या यह भाजपा संस्कृति को शोभा दे रहा है । अब तक बसपा ही इस मामले में बदनाम थी, अब तो भाजपा के दामन भी साफ नहीं है।
मैं भी ठेकेदार जी को शांत करते हुए अपनी थोड़ी - बहुत समझदारी दिखाने का प्रयास किया । भाजपा वाले गलत नहीं हो सकते । लोग उन्हें बदनाम करने में लगे हैं । तुलसी दास जी ने रामचरित मानस में भी कहा है - ‘ प्रभुता पाइ काहि मद नाहि ’। आज केंद्र में तथा प्रदेश में उनकी सरकार है। गाजियाबाद निगम बना तभी से मेयर पद पर भाजपा का ही कब्जा रहा है । 2019 में भी भाजपा ही फिर सत्ता में आयेगी, ऐसी लहर अभी से ही चल रही है। यह लहर भी भाजपा वाले नहीं बल्कि जम्मू - कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा चलाई गई है। ऐसे में भाजपा को आज जो क्रेज है उसे उसके नेता व पदाधिकारी भुना रहे है तो क्या गलत कर रहे है। एक मात्र भाजपा ही ऐसी पार्टी है जो निगम के 100 वार्डो में अपना प्रत्याशी उतार रखी है। बाकी सभी प्रार्टियों के तो पूरे वार्डो में प्रत्यशी उतारने में भी शांस फूल रहा है, चुनाव वे क्या खाक लड़ेंगे। जनता भी नोटबंदी, जीएसटी तथा ‘ मन की बात’ से अंघा गई है। पेट भर गया है और जो पेट भरता है वही अन्नदाता है। सबकी निगाह भाजपा के प्रत्यशी पर और प्रत्याशी की निगाह वोटरों पर लगी हुई है। ऐसे में 20 - 25 लाख की रकम कोई मायने थोड़ी रखता है। जिन्हें टिकट नहीं मिला है वही चिल्ला रहे हैं। जिन्हें मिल गया है वे इतना खर्च कर भी प्रसन्न है। उन्हें तो भ्रष्टाचार मिटा कर भक्त की श्रेणी में जो आना है । आप शांत रहिए, अगर ब्लड प्रेसर बढ़ जायेगा तब आपको ही परेशानी होगी। दिमाग से यह विचार निकाल दीजिए, और हमेशा इसे याद रखिए-
‘‘ तुम भी चरो, हम भी चरे, चरने की आजादी है। 
उनका चरा हुआ ना पनपे, जिनके सर पर खादी है।’’




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