गधे थे, गधे के गधे रह गये Asshole,



मंचासीन दांये से वांये  पदमश्री पत्रकार रामबहादुर राय, साहित्यकार देवेन्द्र शर्मा इंद्र, मेवाड़ के चेयरमैन डा. अशोक गदिया व निदेशिका डा.अलका अग्रवाल।

वसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता )  मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जयंती पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उल्लेखनीय सेवाओं के लिए दो विभूतियों को सम्मानित किया गया। सुप्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ. देवेन्द्र शर्मा इन्द्र को साहित्य गौरव सम्मान प्रदान किया गया। वरिष्ठ पत्रकार नंद किशोर त्रिखा बीमार होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके, उन्हें यह सम्मान उनके घर पर जाकर दिया जाएगा। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री राम बहादुर राय भी मौजूद रहे। 
         

इस अवसर पर संस्था के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने संस्थान की ओर से शाॅल, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न व नकद राशि प्रदान कर डाॅ. इन्द्र को सम्मानित किया। इस मौके पर डाॅ. गदिया ने कहा कि देश के 65 करोड़ युवाओं को अगर सही दिशा की ओर प्रेरित किया गया तो देश में किसी सुख-सम्पदा की कमी नहीं अखरेगी। देश को आर्थिक, सामाजिक, नैतिक सहित हर वर्ग के लिए तैयार करना है तो 65 करोड़ युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ना होगा। राम बहादुर राय ने मालवीय जी के बारे में विस्तार से अपने विचार प्रकट किये और कहा कि समाज को अगर बचाना है तो पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों के क्षरण को रोकना होगा। सम्मान समारोह का संचालन अमित पाराशर ने किया।
      
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध गीतकार डाॅ. कुंअर बेचैन ने की तो संचालन की कमान बाराबंकी से पधारे सुप्रसिद्ध युवा कवि प्रियांशु गजेन्द्र ने संभाली। उनके काव्य पाठ में इन पंक्तियांे को खूब दाद मिली- ‘लक्ष्य सारे सधे के सधे रह गये, हाथ अपने बंधे थे बंधे रह गये, आप मोदी लहर में हुईं मंत्री, हम गधे थे गधे के गधे रह गये।’ डाॅ. कुंअर बेचैन ने अनेक मुक्तकों व गीतों-ग़ज़लों से सबको गहन आनंद के सरोवर में सराबोर कर दिया। उन्होंने कहा- ‘चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया, पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया।’ हास्य कवि वेद प्रकाश वेद की कविताओं और चुटकियों पर श्रोता खूब लोटपोट हुए। 

मेरठ से आये कवि मनोज कुमार मनोज ने ओज की रचनाओं से सबके दिलों को जोश से भर दिया। कवि चेतन आनंद ने अनेक मुक्तकों, नैतिक प्रसंगों व कविता से सबका मन मोहा। उन्होंने इन पंक्तियों पर खूब तालियां बटोरीं- ‘किसने कहा है तुझको तू बाहर तलाश कर, अपनी कमी को अपने ही अंदर तलाश कर।’ तीन घंटे तक चले कवि सम्मेलन में ठंड के बावजूद लोग भारी संख्या में मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम में मेवाड़ की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल समेत तमाम स्टाफ, विद्यार्थी व आसपास के क्षेत्र के लोग शामिल रहे। अंत में मेवाड़ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल ने सभी कवियों व आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।






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