भारत के लिए नई परेशानी बन गया नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार - nepal in pro china oli india faces a himalayan foreig





नई दिल्ली: गुजरात विधानसभा चुनावों के बीच सरकार पाकिस्तान के जिक्र में ही व्यस्त रही और इस बीच नेपाल भारत के लिए नई परेशानी बन गया। पिछले कुछ समय में भारत को पड़ोसी राष्ट्रों से मिलने वाली चुनौती के तौर पर नेपाल उभरकर सामने आ रहा है। नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनी और केपी शर्मा ओली के हाथों में सत्ता की चाबी भारत के लिए खतरे की घंटी है। ओली खुलकर चीन के प्रति अपना झुकाव जाहिर करते हैं। ओली लेफ्ट पार्टियों की साझा सरकार में वरिष्ठ सहयोगी के तौर पर जल्द ही शपथ लेने वाले हैं।



पिछले साल जब ओली को सत्ता छोड़नी पड़ी थी तब उन्होंने काफी तल्ख अंदाज में इसके लिए भारत को ही जिम्मेदार ठहराया था। माओवादियों द्वारा समर्थन वापस लेने के कारण ओली की सत्ता गई थी और ओली ने उस वक्त नेपाल में राजनैतिक अस्थिरता के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। ओली का कहना था कि भारत सरकार नेपाल में रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार चाहती है।

नेपाल में 2015 में संविधान लागू है और वहां के संविधान के अनुसार निष्पक्ष चुनाव और सत्ता के हस्तांतरण की व्यवस्था के निर्देश संयुक्त राष्ट्र ने दिए। नेपाल में चुनावों के ठीक पहले चीन ने इस आशय से अपनी सक्रियता भी दिखाई थी। विदेश मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी कहते हैं, 'नेपाल में दो प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियां सीपीएन-यूएमएल के प्रमुख ओली और सीपीएन (माओवादी सेंटर) के पीके दहल प्रचंड एक साथ आए हैं। नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार का झुकाव निसंदेह चीन की तरफ ही रहेगा।'

चेलानी कहते हैं कि ओली पहले भी भारत को नेपाल में अस्थिरता के लिए दोष दे चुके हैं। चेलानी के अनुसार, 'नेपाल के तराई इलाकों के प्रवासी मधेसियों का रुख भी भारत के हितों के खिलाफ ही रहा है। सत्ता में उनका फिर से लौटना किसी लिहाज से भारत के लिए अच्छी खबर नहीं कही जा सकती है।' पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल कहते हैं, 'नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बनवाने में चीन की पर्दे के पीछे की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस वक्त भारत को यही उम्मीद है कि चीन के प्रभाव में आए बिना ओली परिपक्व तरीके से भारत के साथ संबंध निभाएंगे और भारत के लिए कोई नई परेशानी का कारण नहीं बनेंगे।'
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