कावेरी जल विवाद पर आज फ़ैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट - supreme court may pronounce verdict on cauvery water dispute





नई दिल्ली: तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच 120 सालों से चल रहे कावेरी जल विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला सुनाएगा. चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अमिताभ राय और जस्टिस खानविलकर की बेंच इस मामले में फ़ैसला सुनाएगी. कर्नाटक में कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ये फ़ैसला काफ़ी अहम होगा.


इस मामले पर कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल ने फरवरी 2007 के कावेरी ट्रिब्यूनल के अवार्ड को चुनौती दी है. वहीं, कर्नाटक चाहता है कि तमिलनाडु को जल आवंटन कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करे, जबकि तमिलनाडु का कहना है कि कर्नाटक को जल आवंटन कम किया जाए. ट्रिब्यूनल ने तमिलनाडु में 192 टीएमसी फीट (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) को कर्नाटक द्वारा मेटटूर बांध में छोड़ने के आदेश दिए थे. जबकि कर्नाटक को 270 टीएमसी फीट, केरल को 30 टीएमसी आवंटित किया गया था और पुडुचेरी को 6 टीएमसी आवंटित किया गया था. सभी राज्यों का आधार है कि उनके हिस्से में कम आबंटन दिया गया है. अंतिम सुनवाई 11 जुलाई को शुरू हुई और बहस दो महीने तक चली थी.


कर्नाटक ने तर्क दिया कि 1894 और 1924 में तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के साथ जल साझाकरण समझौता किया गया था और इसलिए 1956 में नए राज्य की स्थापना के बाद इन करारों को बाध्य नहीं किया जा सकता. कर्नाटक ने आगे तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल ने तमिलनाडु को पानी के हिस्से को आबंटित करने में इन समझौतों की वैधता को मान्यता दी है, जो गलत है. राज्य चाहता है कि अदालत कर्नाटक को तमिलनाडु को केवल 132 टीएमसी फीट पानी छोड़ने की अनुमति दे. वहीं, तमिलनाडु ने इन तर्कों का खंडन किया और कहा कि कर्नाटक ने कभी भी दो समझौतों को लागू नहीं किया और हर बार राज्य को अपने अधिकार के पानी के दावे के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगानी पड़ती है.

तमिलनाडु का कहना है कि ट्रिब्यूनल ने ग़लती से कर्नाटक को 270 टीएमसी फीट पानी आबंटित किया था, जिसे कम कर 55 टीएमसी किया जाना चाहिए और तमिलनाडु को और अधिक जल दिया जाना चाहिए.
वहीं केंद्र ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड की स्थापना और ट्रिब्यूनल फैसले को लागू करने के लिए एक योजना तैयार करने के लिए अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया.  केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि कई स्पष्टीकरण याचिकाएं ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं और इसलिए ये उन पर अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहा है.
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