वैशाली, ( प्रमुख संवाददाता ) मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, वैशाली ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर धूम्रपान से होने वाले कैंसर के बारे में जागरूक किया तथा रोगियों को इलाज के सफल मामलों के बारे में भी बताया गया।
मैक्स हॉस्पिटल के डा. दिनेश सिंह (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर, डॉ अरुण गोयल (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर, डॉ गगन सैनी (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के प्रिंसिपल कंसलटेंट) एवम डॉ सौरभ कुमार अरोरा (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के प्रिंसिपल कंसलटेंट) ने अपने विचार रखे। डा.दिनेश सिंह ने अपने केस स्टडी को सभी के साथ साँझा किया।उन्होंने बताया कि 45 वर्षीय नवीन चैरासिया अपनी आवाज की घोरता की समस्या लेकर उनके सामने लाया गया जिसकी जांच से पता चला कि उसके बाएं मुखर कॉर्ड में एक छोटा मुलायम ऊतक घाव मौजूद है। इसके पश्चात् व्यक्ति की बायोप्सी की गयी, जिसके परिणामस्वरूम स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (कैंसर का एक रूप) के होने की पुष्टि की गई। इस केस की सबसे विचित्र बात यह रही कि यह व्यक्ति ना ही धुम्रपान का सेवन करता था और ना तम्बाकू, गुटका, खैनी या पान जैसी आदि सभी चीजे चबाता था। इसी प्रकार से दूसरे केस के बारे में पता चला कि 69 साल के सूरज प्रकाश द्वारा धुम्रपान किये जाने के कारण उसको लारनेक्स (वॉयस बॉक्स) नामक कैंसर का होना पाया गया। डॉ गगन सैनी और डॉ शुभम गर्ग ने बताया कि कैंसर का रेडिएशन थेरेपी और कंकररेंट कीमोथेरेपी से बिना सर्जरी के मरीज के ध्वनि बॉक्स को बचाया जासकता है।
इस अवसर पर सभी के साथ अपने अनुभवों को साँझा करते हुए डॉ सौरभ कुमार अरोरा (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के प्रिंसिपल कंसलटेंट) ने बताया कि स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा यह एक प्रकार का कैंसर होता है, जो कि स्क्वैमस कोशिकाओं से होते हैं। यह कोशिकाएं शरीर में खोखले अंगों की त्वचा की परत की सतह बनाती हैं और श्वास एंवम पाचन तंत्र को रेखांकित करती हैं। मुँह का कैंसर सिर्फ बीड़ी या सिगरेट पीने से ही नहीं बल्कि सूखा तम्बाकू चबाने से भी होता है जैसे कि गुटका, खैनी और पान इत्यादि।



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