प्रभु भक्ति ही सद्गति का मार्ग है Lord devotion is the path of goodness



वसुंधरा, ( संवाददाता )  वसुंधरा सेक्टर - 3 के साॅंई धाम सोसायटी में चल रहा संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ कथा के आज दूसरे दिन संत श्री आत्माराम महाराज जी ने राजा परिक्षित श्राप के साथ ही नारायण के 24 अवतारों में से 3 अवतारों की कथा सुनाई। 

संत जी ने कहा कि हम सब माता के गर्भ में कष्टों से पार पाने के लिए प्रभु की प्रार्थना करते हैं और बार - बार यह विनती करते है, बाहर आकर प्रभु की प्रार्थना और सेवा करेंगे। लेकिन जैसे ही पृथ्वी पर जन्म लेते हैं, प्रभु से की गई विनती भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाहर आकर हम मोह, ममता, माया, लोभ लालच में घिर जाते हैं और भगवान से किया गया वादा भूल जाते है। 

संत आत्माराम जी ने कहा कि राजा परिक्षित भारत वर्ष के सबसे श्रेष्ठ राजाओं में थे। लेकिन जब कलियुग का आगमन हुआ तो उनकी बुद्धि भी मलिन हो गई । जब राजा परिक्षति अपने ज्येष्ठ पुत्र जनमेजय को राज गद्दी सौंप कर बन में जाने की योजना बनाने लगे थे, तभी उनके मन में आया कि एक बार अपने पूर्वजों के शयनकक्ष और शस्त्रागार को देख लूं। वे शयनकक्ष के बाद शस्त्रागार में गये तो उनको वहां सबसे सुंदर मणिजड़ित एक मुकुट दिखाई दिया। उन्होंने वह मुकुट अपने सर पर धारण कर वन भ्रमण को चले गये। रास्ते में उन्हें कई ऐसी स्थिति दिखाई दी जिसे देखकर वह दंग रह गए। उन्होंने एक गाय को देखा जो तीन टांग पर खड़ी थी, और एक दैत्यतुल्य काला व्यक्ति हाथों में नंगी तलवार लेकर गाय के चैथा टांग भी काटने का प्रयास कर रहा था। यह देख राजा को बहुत क्रोध आया और उससे पूछे कि तू कौन है और मेरे राज्य में तीन टांग की यह गाय जो पहले से ही पीड़ा से जुझ रही है तू उसका चैथा पैर भी क्यों काटना चाहता है। दैत्यकार व्यक्ति ने कहा कि मैं कलियुग हूं। राजा उसपर क्रोधित होते हुए अपने राज्य से निकल जाने का आदेश दिया। कलियुग राजा के पैरों में गिर गया और राज्य में ही रहने की प्रार्थना की । अंत में राजा उस पर दया करते हुए उसे राज्य में रहने की अनुमति दे दी। कलियुग अपना छोटा रूप बनाकर राजा के मुकुट में रहने लगा। उसके प्रभाव से राजा की बुद्धि छीण होने लगी। अंत में कलियुग ने ही राजा की मृत्यु का कारण बन उन्हें तक्षक सर्प से ढसाने का श्राप दिलाया। 

संत जी ने कहा कि धर्म का प्रभाव जब कम होता है, तब कलियुग का प्रभाव बढ़ जाता है और कई तरह की अनहोनी घटनाएं होने लगती है। उन्होंने देश में भाईचारा, प्रेम और स्मृधि के लिए धर्म के प्रचार - प्रसार पर जोर दिया। कल चैथे दिन वामन अवतार की कथा सुनाई जायेगी। 

इस अवसर पर नितिन जैन, धनंनजय मणि त्रिपाठी, निर्मला देवी, प्रेमलता त्रिपाठी, चंचल भारद्वाज, स्वर्ण भाटी, वरून बंसल, सतीश चन्द्र शर्मा, नवल सिंह यादव, प्रवेश शर्मा, नितिन माथुर, प्रकाशचंद वाही आदि ने अपना भरपूर सहयोग दिया।   



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