साहिबाबाद, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो ) मुरादनगर की नया नूरगंज कालोनी में रहने वाले अलीमुद्दीन की पुत्री आसमीना का बेटे सुबान(1बर्ष ) के 21 नवम्बर 2014 को वहां के नाले में गिर कर हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने परिजनों को एक लाख का मुआवजा देने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। घटना के समय बालक घर के सामने खेल रहा था जो खेलते खेलते घर के बाहर बह रहे असुरक्षित नाले में गिर गया था।
साहिबाबाद निवासी मानव अधिकार कार्यकर्ता राजीव कुमार शर्मा ने इस मामले को 5 जनवरी 2015 को मानव अधिकार आयोग में उठाया तथा एक याचिका दाखिल करते हुए नगर पालिका परिषद मुरादनगर और जिला प्रशासन गाजियाबाद को सुबान की मौत का जिम्मेदार बताते हुए घटना के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने और मृतक के परिजनों को राज्य सरकार से आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की थी। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 17 जनवरी 2015 को डी एम गाजियाबाद और प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजकर इस मामले में जिला प्रशासन और शासन द्वारा की गई कार्यवाही की रिपोर्ट मानव अधिकार आयोग में पेश करने का आदेश दिये थे। लेकिन इस मामले में 24 मार्च 2015 को मानव अधिकार आयोग को मुरादनगर नगर पालिका द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में अपने आपको बेकसूर बताते हुए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को जिम्मेदार बताया था।
इस मामले की सुनवाई के बाद मानव अधिकार आयोग ने सुबान की मौत का जिम्मेदार जिला प्रशासन को माना और कहा कि हर हाल में मृतक बच्चे सुबान की मौत का जिम्मेदार जिला प्रशासन है जिसकी लापरवाही के कारण सुबान की केवल मौत ही नही हुई है बल्कि उसका जीवन जीने के अधिकार यानी मृतक सुबान के मानव अधिकारो का भी हनन हुआ है इसलिए राज्य उसके परिजनों को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को मृतक सुबान के परिजनों को एक लाख रुपये का भुगतान कर भुगतान के सबूत 30 अगस्त तक आयोग को सौंपने का आदेश दिया है।



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