अटल जी की याद में पहले से ही गमगीन बैठे थे तभी ठेकेदार जी आ गए। वे भी कुछ - कुछ उदास ही दिख रहे थे। कुछ छण हम दोनों ही मौन रहे, लेकिन ठेकेदार जी ने आखिर बात की शुरूआत कर ही दी। उन्होंने कहा कि अपने प्रिय के जाने का जितना दुख आज तक हमें नहीं हुआ, उससे ज्यादा दुख आज अटल जी के जाने से हो रहा है। कभी तो यह सोच कर मन बेचैन हो जाता है कि क्या भाजपा सत्ता से हटने के बाद फिर कभी यह मुकाम हासिल कर पायेगी जो इसे मिला हुआ है। इस मुकाम के लिए अटल, अड़वानी की जोड़ी ही मुख्य कारक रही है। लेकिन आज अटल तो चले गए और अड़वानी दूध की मक्खी के तरह बाहर निकाल फेंक दिए गये हैं। मैने ठेकेदार जी को ढाढस बंधाते हुए कहा कि भाजपा अब अपने पैरों पर पूरी तरह खड़ी हो गई है। सिर्फ खड़ी ही नहीं दौड़ भी रही है। जब तक बच्चा बड़ा नहीं होता तब तक मां - बाप को उसे उंगली पकड़ कर चलाना पड़ता है, लेकिन जैसे ही वो दौड़ना शुरू कर देता है, फिर मां - बाप को उससे पूछना पड़ता है कि - ‘बेटा ! कहां गए थे। पूरे दिन घर से गायब रहते हो। बता कर जाया करो।’ बेटा तब भी बात मानने को तैयार नहीं होता जानते हो क्यों, क्योंकि अब वो दौड़ना सीख गया है। यही हाल बीजेपी की है। ठेकेदार जी ने बहुत जोर की हंसी हंसे और बोले - ‘ यह तो देखा ही है कि जब बच्चा ज्यादा तेज दौड़ने लगता है तो फंसते मां - बाप ही है। भुगतना मां - बाप को ही पड़ता है। कांग्रेस को ही देख लो अब किस तरह ताड़ से गिरे खजूर पर अंटके जैसे हालात से जूझ रही है। हो सकता है कि भाजपा की इससे भी बूरी हाल हो। मैने कहा - ऐसा नहीं कहते। आज चारो तरफ बीजेपी की ही जलवा है। कांग्रेस की भी कभी जलवा थी। लेकिन जब गई तो सबसे बुरी हालात बन गई। आज कांग्रेस अध्यक्ष टो - टो कर सवारी करने पर मजबूर है। झट से ठेकेदार जी ने मेरी बात काटते हुए कहा। जरा याद करो अन्ना और बाबा रामदेव का अनशन। कांग्रेस भी उस समय आपे से बाहर थी। उसके नजर में किसी का कोइ्र महत्व नहीं था। उसके मंत्रियों के चैकड़ी खुब - अनाप शनाप बोल रहे थे। आये दिन भ्रष्टाचार का उजागर हो रहा था। आम जनता ब्याकुल हो गई थी। कई कारणों और कई कांग्रेसी नेताओं के घमंडी बोल ने 2014 में इसके पतन के लिए जिम्मेदार बने। आज भी कई ऐसे संगठन कुकुरमुत्तों के तरह उग आये है जो बीजेपी के लिए सोशल मीडिया और भीड़तंत्र बन कर आम जनता से जूझ रहे है। जैसे कांग्रेस को डूबाने में कुद लोगों का योगदान था, उसी तरह अब बीजेपी के लिए इन लोगों का योगदान बन रहा है। बाबा रामदेव और अन्ना ने कांग्रेस के पटाक्षेप की कहानी तैयार की, ठीक वैसा ही स्वमी अग्निवेश और आये दिन माॅब लिंचिंग की घटनाएं बीजेपी के लिए कहानी गढ़ने में लगी है। यकिन न हो तो देख ले कि बीजेपी के 2014 के लहर में और 2018 में मितने का अंतर है। नोटबंदी, जीएसटी मंहगाई भी है लेकिन इनके सामने वे अब बौने लग रहे है। यह गुझा तो अटल जी में ही था कि वे गलत को गलत कहते थे और लोगों को बीजेपी के लिए बांध कर रखते थे। धर्म बहुत दिन तक राजनीतिक हथियार नहीं बन पाता है। विचार और कार्य ही विकास तथा पतन के लिए जिम्मेदार होते है।
संजय त्रिपाठी



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