बुलंदशहर, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो ) बुलंदशहर के स्याना गांव में सोमवार को गौहत्या की अफवाह के बाद फैली हिंसा और एक पुलिस अधिकारी के मारे जाने के मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्य आरोपी योगेश राज अभी फरार है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आनंद कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि सोमवार को हुई हिंसा के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है तथा कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं और इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
एडीजी ने बताया कि दंगा फैलाने और हत्या के मामले में दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 27 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी तथा 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है।
इस घटना में दरोगा सुभाष चंद्र द्वारा थाने में लिखाई गई एफआईआर के मुताबिक, दिनांक 3 दिसंबर को बुलंदशहर जिले के स्याना थाना क्षेत्र के अन्तर्गत महाव के जंगल में गोकशी की घटना की सूचना मिली थी। सूचना मिलने पर पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार, उपनिरीक्षक सुभाष चंद्र, हेड कांस्टेबल शीशराम सिंह, हेड कांस्टेबल वीरेंद्र सिंह, कांस्टेबल अमीर आलम, कांस्टेबल शैलेंद्र, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल प्रेमपाल, होमगार्ड दिनेश सिंह के साथ मौके पर गए थे। पुलिस के पास टाटा सूमो यूपी 13 एजी 0452 थी, जिसे हेडकांस्टेबल रामआसरे चला रहा था।
एफआईआर में बताया गया कि जब पुलिस महाव गांव स्थित घटनास्थल पर पहुंची तो भीड़ लगी हुई थी। भीड़ में मुख्य आरोपी योगेश राज समेत 27 नामजद और 50-60 लोग, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे। मौके पर उपस्थित भीड़ ने पुलिस को देखते ही विरोध शुरू कर दिया। प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने लोगों को समझाने की कोशिश की। लेकिन भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।
पथराव के बाद योगेश राज और अन्य लोगों के नेतृत्व में उत्पाती भीड़ ने दोपहर करीब 1.35 बजे चिंगरावठी चैकी के सामने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान एसडीएम और क्षेत्राधिकारी स्याना लगातार उग्र भीड़ को माइक पर समझाते रहे। उन्हें स्याना कोतवाली चलकर एफआईआर की कॉपी लेने के लिए भी कहा गया। लेकिन नामजद आरोपी उन्हें भड़काते रहे। बाद में ग्रामीणों ने एकजुट होकर पुलिस पर हमला बोल दिया।
एफआईआर की काॅपी -
इस बीच, हिंसा के दौरान मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की बहन सुनीता सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके भाई की हत्या पुलिस के षडयंत्र से हुई है। सुनीता ने कहा ‘‘मेरा भाई पुलिस के षडयंत्र के कारण मारा गया क्योंकि वह दादरी के गौहत्या मामले की जांच कर रहा था।’’ उन्होंने अपने भाई को शहीद का दर्जा देने और उनका स्मारक बनाने की मांग करते हुए कहा ‘‘मुख्यमंत्री गाय गाय रटते रहते हैं, आखिर वह गौ रक्षा के लिये क्यों नहीं आते हैं?
मारे गये इंस्पेक्टर के पुत्र अभिषेक ने कहा कि उसके पिता उसे एक अच्छा नागरिक बनाना चाहते थे जो समाज में धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा न दे। उसने कहा ‘‘मेरे पिता ने हिंदू मुस्लिम विवाद के चलते अपनी जान गंवा दी। अब किसके पिता की बारी है?’’ अभिषेक ने कहा कि आखिरी बार जब उसने अपने पिता से बात की थी तो उन्होंने उससे पूछा था कि क्या उसने खाना खा लिया, और पढ़ाई की या नहीं ?’’।इससे पहले एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने बताया कि हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इस जांच में पता लगाया जाएगा कि हिंसा क्यों हुई और क्यों पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को अकेला छोड़कर भाग गए।
आईजी मेरठ रेंज की अध्यक्षता में गठित एसआईटी गोकशी के आरोप और हिंसा दोनों की जांच करेगी। एसआईटी में तीन से चार सदस्य होंगे। बताया जाता है कि एक आरोपी योगेश राज बजरंग दल का जिला संयोजक है।






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