जेएनयू में देश विरोेधी नारेबाजी की जांच कर रही कमेटी ने 21
स्टूडेंट्स को दोषी माना है। 9 फरवरी को यूनिवर्सिटी कैंपस में संसद पर
हमले की साजिश रचने वाले आतंकी अफजल गुरु के सपोर्ट में एक प्रोग्राम का
आयोजन किया गया था। हालांकि विरोध होने पर इसे रोक दिया गया। इसके बाद
स्टूडेंट्स ने अफजल के सपोर्ट में कश्मीर की आजादी और देश विरोधी नारेबाजी
की। जेएनयू की एक हाई लेवल कमेटी इस मामले की जांच कर रही है। कुछ स्टूडेंट्स का जुर्माना घटाया
जांच कमेटी ने 21 स्टूडेंट्स को अनुशासन तोड़ने
का दोषी माना है, जिन्हें अफजल पर प्रोग्राम करने के लिए सजा दी गई थी। हालांकि, सभी पर सजा अभी बरकरार है, लेकिन कुछ स्टूडेंट्स पर लगाए जुर्माने को घटाया गया है। कमेटी के फैसले की जानकारी स्टूडेंट्स को भी दी गई है। अभी ये साफ नहीं है कि जुर्माना घटाने से किसे फायदा मिला।
जेएनयू में लेफ्ट स्टूडेंट्स के ग्रुप्स ने अफजल गुरु और जेकेएलएफ के को-फाउंडर मकबूल भट की याद में प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया था। इसे कल्चरल इवेंट का नाम दिया गया था। प्रोग्राम पर बैन लगाए जाने पर
साबरमती हॉस्टल के सामने कुछ स्टूडेंट्स ने देश विरोधी नारेबाजी की। इसके बाद लेफ्ट और एबीवीपी स्टूडेंट्स के बीच झड़प हुई। 10 फरवरी को देश विरोधी नारेबाजी का वीडियो सामने आया था। 12 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में स्टूडेंट्स पर देशद्रोह का केस दर्ज किया। जेएनयू स्टूडेंट लीडर कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान समेत कई स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी हुई। फिलहाल उन्हें बेल मिल गई है।



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