14 जांबाज परमबीर चक्र विजेता जवानों की वंदना की गई 14 brave soldiers hymn Prmbir Chakra



गाजियाबाद,  ( संवाददाता ) कविनगर स्थित रामलीला मैदान पर आज चैथे और अंतिम दिन हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में देश की शान और आन की खातिर मर मिटने वाले भारतीय सेना के 14 जांबाज  परमवीर चक्र विजेता जवानो की आज हिन्दू संस्कृति एवं ंविधिविधान के तहत उनकी वंदना की गयी। खास बात यह है कि एक नये अंदाज में स्कूली बच्चो ने सबसे पहले सिलसिलेवार मैं हूं परमवीर चक्र्र विजेता ,,,,,,,,,,,, का पूरा जीवन परिचय जोशिले रूप मंे दिया। जिस समय यह कार्यक्रम चल रहा था ,पूरा पंडाल भावविभोर हो गया। वीरो की गाथा सुनकर  उपस्थित दर्शको की आंखो में अश्रूधारा बहने से नही रूक पायी। इस अवसर पर भारतीय थल सेना के पूर्व मेजर जनरल जीडी बख्शी इस खास कार्यक्रम में शिरकत करने और स्कूली बच्चो की हौसला अफजायी करने के लिए मौजूद थे। इसके अलावा प्रमुख कथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज और पावन चिन्तन धारा के प्रमुख पवन सिन्हा भी मौजूद थे। 

ये है भारत माता के 14 परमवीर चक्र  विजेता सपूत -
इस खास मौके पर भारत माता के जिन 14 परमवीर चक्र विजेताओ की वंदना की गयी  और उनके पराक्रम व योद्वा होने के बारे ममें स्कूली बच्चो ने जानकारी दी उनके नाम हैं -सूबेदार जोगेद्र सिंह , लांस नायक एलबर्ट एक्का लेफिटिनेन्ट मनोज पांडेय , योगेन्द्र सिंह यादव ,कैप्टन विक्रम बत्रा ,सूबेदार मानसिंह ,मेजर आर परमेश्वर ,अरूण क्षेत्रपाल ,मेजर होशियार सिंह,मेजर शैतान सिंह , अब्दुल हमीद ,आरदेशीयर बुरजार ,जीतारा पोश, निर्मल जीत सिंह ,रामरधोबाराणा।

कुर्बानी देने वाला हर सैनिक कहता है फिर मुझे कुर्बानी देने का मौका मिले-मेजर जनरल बख्शी
इस मौके पर उपस्थित भावुक  जनसमुदाय को संबोधित करते हुए भारतीय सेना के अवकाश प्राप्त मेजर जनरल जीडीबख्शी ने कहा कि भारत की सीमा पर जब कोई जवान अपनी कुर्बानी देता हे तो उसे तनिक भी अफसोस नही होता ,बल्कि फख्र होता है।  और वह अपने ईष्टदेव से प्रार्थना करता है कि अगला जन्म उसका भारत माता की गोद में हो, और मौका मिलने पर भारत मां के दूध का कर्ज इसी शान से अदा करें। उन्होने उपस्थित जनसमुदाय से अपील करते हुए कहा  िकइस तरह के कार्यक्रम से सीमा पर तैनात हमारे जवानो का हौसला बढता है। ऐसे कार्यक्रम होते रहना चाहिए। 
इसीक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी महेशवरानन्द महाराज ने कहा कि इतिहास बताता है कि वीरभोग्या  वसुन्धरा ,जिस भूमि में वीर पैदा नही होते वह देश दुनिया के पटल से मिट जाता है। परमवीर वह वीर होता है जिसकी वीरता पराक्रम उच्च कोटि का हो । ऐसे वीरो का नमन स्वयं मंें आनन्द प्रदान करने वाला होता है। 

सामाजिक समरसता सम्मेलन-
इससे पूर्व पहले सत्र में सामाजिक समरसता के मुददे पर एक विराट सम्मेलन का आयोजन हुआ ,जिसमें विभिन्न धर्मो और जाति के थिंक टैंक ने भाग लिया। इस सम्मेलन में भारत की एकता और अखंडता पर जोर दिया गया। इस मौके पर आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक आलोक पूज्य संत श्रीमान दास जी विश्व हिन्दू परिषद के महामंत्री चम्पत राय ने अपने संबोधना में देश समरसता के भाव की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था किसमरसता के भाव को जाग्रत करने का काम ऐसे आयोजनो से ही हो सकता है। 
मेले के अंतिम और चैथे दिन कविनगर का रामलीला मैदान ढाई लाख से भी अधिक भीड का साक्षी बन गया। मेला के मीडिया प्रभारी विपिन त्यागी ने बताया कि उप्र में इस प्रकार का यह पहला आयोजन था, जो काफी कामयाब रहा। इसके बाद इस मेले को उप्र के अन्य महानगरो में भी आयोजित करने की योजना बन रही है। 



Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment