अखिलेश यादव के बस से फोटो हटाने से मची अफरातफरी Akhilesh Yadav remove photos from the bus resembled chaos



साहिबाबाद, ( प्रमुख संवाददाता ) समाजवादी पार्टी की लखनऊ में हो रही रस्साकषी के चलते साहिबाबाद डिपो में खड़ी बसों पर लगे सरकारी योजनाओं के पोस्टरों को हटाने की सोशल मीडिया पर चली खबरों से चारों ओर अफरा तफरी मच गयी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे तव पता चला कि बस में लगे पोस्टर बदलने जाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन किसी ने शरारतन फोटो बायरल कर दी है।
        समाजवादी पार्टी के अंदर चल रही कुश्ती के दंगल के दौरान साहिबाबाद बस अड्डे पर खड़ी रोडवेज की अनुबंधित बसों से अखिलेश यादव के फोटो वाले पोस्टर हटाए जाने की शनिवार को चली खबर से सनसनी फैल गयी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो की असलियत जानने को पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारियों ने दौड़ लगायी और वे रोडवेज बस अड्डे पहुंचे। तव अधिकारियों ने उन्हें बताया कि अनुबंधित बस से सरकारी योजना के पोस्टर हटाए जाना एक प्रक्रिया है। किसी ने फोटो खींचकर शरारत के इरादे से फोटो वायरल कर दी है। दरअसल यह पोस्टर बदलने की महज एक प्रक्रिया भर है। तव अधिकारियों के जान में जान आयी। 
        गौर तलव है कि खबर में साहिबाबाद डिपो में खड़ी यूपी रोडवेज की बस से अखिलेश यादव के फोटो वाले पोस्टर को फाड़ते हुए एक युवक को दिखाया गया था। इस फोटो के सोशल मीडिया पर आने के साथ चर्चा हुई कि अखिलेश यादव का भी विरोध शुरू हो गया है। कुछ लोग इसे शिवपाल यादव के समथकों की करतूत बता रहे थे। 
        यूपी रोडवेज के एआरएम अनिल कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रचार वाले पोस्टर बसों पर लगाए जाते हैं। इनका बाकायदा हर बस के लिए अनुबंध होता है। पोस्टर लगाने के लिए दो माह का समय था। वह पूरा हो गया तो दूसरा पोस्टर लगाया जाना है। इसी क्रम में पुराने पोस्टर को हटाया जा रहा है। इसका किसी राजनीतिक घटना से संबंध नहीं है। जो पोस्टर हटा रहा है वह एक मजदूर है।




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