सरकारी भूमि कब्जाने वालों पर कार्यवाही न करने पर
साहिबाबाद, ( प्रमुख संवाददाता ) सरकारी भूमि कब्जाने पर भूमाफियाओं के खिलाफ कार्यवाही न करना तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को नजरअंदाज करना जीडीए सचिव, जिलाधिकारी,नगर आयुक्त तथा थानाध्यक्ष साहिबाबाद को भारी पड़ गया है। अदालत ने इसे अवमानना मानते हुए सभी को 12जनवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में तलब किया है।
मामला शालीमार गार्डन मेन के बी ब्लाक में 800 मीटर के एक भू खण्ड से जुड़ा है जो राजस्व अभिलेखों मे ग्राम पसोंडा के खसरा नम्बर 1666 पर दर्ज है तथा यह भूमि नगर निगम गाजियाबाद की संपत्ति बतायी गयी है। इस भू खण्ड पर कब्जे को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता राजीव कुमार शर्मा ने पहले नगर निगम से भूखडं संबंधी प्रमाण एकत्र किये जिसमें बताया गया है कि यह भूखंड एलएमसी है यानी नगर निगम का है। इसके बाद जिला प्रशासन,जीडीए सचिव तथा नगर आयुक्त गाजियाबाद को पत्र लिख कर इस भूखंड पर भूमाफियाओं द्वारा किये जा रहे कब्जे को रोकने तथा भूमि को मुक्त कराने की मांग की गयी थी। लेकिन जिला प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की। आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से उक्त भूखंड की रजिस्ट्री करा ली तथा इस पर बहुमंजिला भवन तैयार कर लिया।
इसकी शिकायत 3 जून 2016 को शहीद नगर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राजीव कुमार शर्मा ने एसडीएम गाजियाबाद से की एसडीएम गाजियाबाद ने इस भूमि को नगर निगम की संपत्ति बताते हुए नगर निगम के सम्पत्ति विभाग को कार्यवाही करने के लिए लिखा। नगर निगम के सम्पत्ति प्रभारी एमपी सिंह और नगर आयुक्त अब्दुल समद ने 10 जून 2016 को एसएचओ साहिबाबाद को पत्र लिखकर सरकारी भूमि पर कब्जा कर हो रहे निर्माण को रुकवाने और सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाले भू माफियाओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। आरोप जिला प्रशासन पर यह लगा कि इन भूमाफियाओ को सत्ताधारी पार्टी के 2 नेताओ का संरक्षण होने के चलते थाना साहिबाबाद पुलिस ने ना तो सरकारी भूमि पर हो रहे निर्माण को रुकवाया और ना ही भू माफियाओ के खिलाफ कोई कार्यवाही की । 30 जून 2016 को आरटीआई कार्यकर्ता ने डीएम, एसएसपी और नगर आयुक्त से भी सरकारी भूमी को भू माफियाओ के कब्जे से मुक्त कराने की फिर से मांग की।
लेकिन जब इस मामले मे जिला प्रशासन की और से कोई कार्यवाही नही हुई तो आरटीआई कार्यकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 15 सितम्बर 2016 को एक जनहित याचिका दायर कर दी तथा सरकारी भूमि को भू माफियाओ के कब्जे से मुक्त कराने की गुहार लगायी । इलाहबाद हाईकोर्ट ने 19 सितम्बर को जीडीए सचिव और साहिबाबाद थाना पुलिस को सरकारी भूमि पर हो रहे निर्माण को तत्काल रुकवाने का आदेश दिया था । मगर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकारी भूमि पर भूमाफियाओ ने 4 मंजिला बिल्डिंग का निर्माण कर दिया। साहिबाबाद थाना पुलिस, जीडीए और जिला प्रशासन पर उल्टा भू माफियाओ की मदद करने के आरोप लगने लगे । आरोप तो यहां तक है कि जिला प्रशासन ने जान बूझ कर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की।
याचिकाकर्ता ने 15नवम्बर 2016 को हाईकोर्ट के आदेश की जानबूझ कर अवमानना करने के मामले मे डीएम, एसएसपी,नगर आयुक्त , जीडीए सचिव और एसएचओ साहिबाबाद के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की जिस पर 17नबम्बर 2016 को इलाहबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए अदालतीे आदेश की जान बूझकर अवमानना करने का दोषी मानते हुए 12जनवरी2017 को जिलाधिकरी गाजियाबाद निधि केसरवानी, एसएसपी दीपक कुमार, जीडीए सचिव रविन्द्र गोडबोले, नगर आयुक्त अब्दुल समद तथा एसएचओ साहिबाबाद धीरेन्द्र यादव को हाईकोर्ट मंे तलब किया है।



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