छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से मांगी लिखित माफ़ी
कॉलेज प्रशासन के भेद-भावपूर्ण रवैये की शिकायत यूजीसी और दिल्ली महिला आयोग में ले जाने का किया फैसला
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) आज बड़ी संख्या में एसओएल की छात्राओं ने मिरांडा हाउस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया| उन्होंने कॉलेज प्रशासन से लिखित माफ़ी और छात्राओं को उनके सभी जनतांत्रिक अधिकार दिए जाने की भी मांग उठायी| छात्राओं ने एसओएल में उनके साथ हो रहे भेद-भाव और समस्याओं पर एक नाटक भी प्रस्तुत किया| आम सभा में प्रख्यात महिला-अधिकार कार्यकर्त्ता, डॉ. माया जॉन ने भी छात्राओं के संघर्ष को समर्थन देते हुए अपनी बात रखी| ज्ञात हो कि एसओएल छात्राओं को मिरांडा हाउस सेंटर में रविवार को कक्षा दी जाती हैं, परन्तु स्टडी सेंटर में एसओएल प्रशासन द्वारा छात्राओं को एक जेलनुमा माहौल में कैद कर पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है| ज्ञात हो कि छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश देने के लिए एसओएल स्टाफ द्वारा उनका पहचान-पत्र जमा कर लिया जाता है और जो छात्राएं अपना पहचान-पत्र देने से मना देती हैं, उन्हें कॉलेज जाने से रोका जाता है|
कॉलेज में जो छात्राएं प्रवेश पा लेती हैं, उन्हें 150 छात्राओं की भीड़-भरी कक्षाओं में जबरदस्ती बैठने को मजबूर किया जाता है| यही नहीं मिरांडा हाउस के इस सेंटर में महिला-विरोधी नियमों द्वारा छात्राओं को परेशान किया जा रहा है, जिनको तोड़ने पर कॉलेज से बाहर निकाल दिए जाने की चेतावनी दी गयी है| छात्राओं को बाल सँवारने और सेल्फी खींचने पर कॉलेज से बाहर निकाल दिए जाने के लिए धमकाया जाता है| साथ ही पार्क और कैंटीन में बैठने न देने और यहाँ तक कि क्लास के बीच स्टडी मटेरियल भी एक दूसरे को देने को लेकर मना किया जाता है| इन नियमों से साफ़ दिखता है कि मिरांडा हाउस सेंटर को छात्राओं के लिए जेलनुमा बना दिया गया है|
ज्ञात हो कि जो कॉलेज खुद को प्रगतिशील मानता है, उसके द्वारा निर्मित यह नियम उसका वर्गीय, भेदभावपूर्ण और महिला-विरोधी चरित्र दिखाते हैं, क्योंकि यह नियम सिर्फ गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग से आने वाली एसओएल छात्राओं के लिए ही लगाये गये हैं| जो छात्राएं रविवार को यहाँ कक्षा लेने आती हैं, उन्हें रेगुलर कालेजों में सीट कम होने के कारण एडमिशन नहीं दिया जाता है| इस तरह के भेदभावपूर्ण रवैये और बदतमीजी से परेशान होकर ज्यादातर छात्राएं अगली क्लासों में नहीं आतीं| इससे साफ़ कहा जा सकता है कि कॉलेज प्रशासन वंचित घरों से आने वाली छात्राओं को नहीं पढ़ने देने की कोई भी कसर नहीं छोड़ रहा है|
छात्राओं ने इस मामले को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और दिल्ली महिला आयोग तक ले जाने का निर्णय लिया है|


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