नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता ) आज विश्व पुस्तक मेले का अंंितम दिन और रविवार अर्थात् छुट्टी का दिन। आज भी मेले में सुबह से ही पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिली। अभिभावक अपने बच्चों के साथ पूरे उत्साह एवं जोश से पूर्ण नज़र आए तथा बच्चे भी अपनी पसंदंीदा पुस्तकों का बैग हाथ में लेकर चलते हुए अत्यंत प्रसन्न थे।
इस बार मेले की थीम ’मानुषी’ तथा एनबीटी के 60 वर्षों की यात्रा को प्रस्तुत करती विशेष प्रदर्शनी ’यह मात्र सिंहावलोकन नहीं’ दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र रही। थीम मंडप में प्रतिदिन थीम आधारित अनेकानेक संगोष्ठियों, चर्चाओं-परिचर्चाओं एवं फिल्मों के प्रदर्शन के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों ने पुस्तक मेले को पुस्तकमय बनाए रखा। आज मेले का अंंितम दिन भी अनेक संास्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों का साक्षी रहा। आज हाॅल नं. 8 के साहित्य मंच में एक पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में सुब्रह्मण्यम स्वामी की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र थी।
इन नौ दिनों में बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने बाल मंडप पर आयोजित रचनात्मक एवं सृजनात्मक गतिविधियों का भरपूर लाभ उठाया। सभी आयु-वर्गों के पुस्तक प्रेमियों ने इन कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। बाल मंडप में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे अपने अभिभावकों एवं शिक्षकों के साथ आते रहे।
इस वर्ष नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के दौरान विभिन्न क्षेत्रों जैसे साहित्यिक, राजनीतिक, फिल्मी आदि की अनेक प्रसिद्ध हस्तियों ने शिरकत की ।
मेले को अधिक मनोरंजक और आकर्षक बनाने के लिए प्रतिदिन शाम हंसध्वनि थिएटर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों को दर्शकों ने बहुत अधिक सराहा।
इस बार पुस्तक मेले की खास बात यह रही कि यह पुस्तक मेला नोटबंदी के किसी भी प्रभाव से न केवल बेअसर रहा बल्कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पुस्तक मेले में आने वाले पुस्तक प्रेमियों की संख्या में 15 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ोतरी हुई।


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