घरेलू कामगारों और अन्य संगठनों ने गुडगाँव पुलिस कमिश्नर कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन protest at Gurgaon police commissioner's office



  • रंजीता के हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार करने के उठाई मांग!


  • घरेलू कामगारों ने संगठित होने और रंजीता के लिए न्याय के लिए अपने संघर्ष को और तेज़ करने का संकलप लिया


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  घरेलू कामगार, रंजीता ब्रह्मा की मृत्यु के सम्बन्ध में आज बड़ी संख्या में घरेलू कामगारों और अन्य संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया| इस प्रदर्शन में सभी समुदायों के घरेलू कामगार और अन्य संगठनों, घरेलू कामगार यूनियन (जी.के.यू), नार्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (नेफिस) और आल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (आबसू) के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए| 
ज्ञात हो पिछले दिनों रंजीता ब्रह्मा की मृत्यु के ज़िम्मेदार लोगों को सुशांत लोक थाने के पुलिसकर्मियों ने बचाने की कोशिश की थी| परन्तु घरेलू कामगारों और संघर्षशील महिला केंद्र (सी.एस.डब्ल्यू) के विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस को एफ.आई.आर दायर करने को मजबूर होना पड़ा था| इसके अतिरिक्त, घरेलू कामगारों के दबाव में पुलिस को एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन  टीम (एस.आई.टी) भी नियुक्त करनी पड़ी थी| आज कामगारों के प्रतिनिधिमंडल ने डीसीपी (पुलिस मुख्यालय) से मुलाक़ात कर जवाब माँगा कि क्यों अभी तक रंजीता की मौत के दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है और मामले की हत्या के नज़रिए से क्यों तहकीकात नहीं की जा रही है| प्रेस विज्ञप्ति लिखे जाने तक प्रतिनिधिमंडल की एस.आई.टी प्रमुख, एसीपी हरिंदर कुमार के साथ बात-चीत जारी थी|

ज्ञात हो कि मृतक असम निवासी रंजीता ब्रह्मा, एक दम्पति, रोहित और सोनल मेहता के घर घरेलू कामगार के तौर पर कार्यरत थीं | उन्हें दंपत्ति द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था| दम्पति ने उन्हें नौकरी नहीं छोड़ने के लिए मजबूर करने के लिए जबरदस्ती कैद किया हुआ था| इस तरह का दबाव बनाने के बाद संधिग्ध रूप से उनकी मृत्यु पिछले शुक्रवार को हो गई| ध्यान देने की बात है कि शनिवार को उक्त घटना पर पुलिस द्वारा एसआईआर दाखिल करने में भी आनाकानी की जा रही थी जो बाद में सीएसडब्लू सदस्यों द्वारा भारी दबाव बनाये जाने के बाद पुलिस ने दायर किया| रंजीता ब्रह्मा की मृत्यु से समाज में आमतौर पर घरेलु कामगारों पर हो रहे अत्याचार और उनके काम करने की खराब परिस्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है| साफ़ दिखता है कि मालिक उनके मौलिक अधिकारों का भी हनन करते हैं| अपमानजनक व शोषणकारी माहौल में काम करने को मजबूर उत्तर-पूर्व व आदिवासी इलाकों की महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं| किसी दुर्घटना, उत्पीडन व हिंसा की स्थिति में भी पुलिस मालिकों का पक्ष लेती है व मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाती है, जैसा की इस मामले में भी हुआ|

सीएसडब्लू की मांग है कि मृतक को जल्द-से-जल्द न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्यवाही हो और रंजीता की मृत्यु की हत्या के नज़रिए से तहकीकात की जाये| रंजीता की मौत के ज़िम्मेदार दंपत्ति को तुरंत गिरफ्तार करने की भी सीएसडब्लू मांग करता है| घरेलू कामगारों ने खुद को संगठित करने और रंजीता को न्याय दिलाने के लिए अपने आन्दोलन को और तेज़ करने का संकल्प लिया है|





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