वसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता ) श्रीमद भागवत कथा के आज छठे दिन याज्ञिक महराज पं0 जयप्रकाश शर्मा जी ने सूर्य वंश की कथा सुनाते हुए समझाया कि रामायण हमारे जीवन की सरस्वती है जबकि भागवत कथा हमारी मृत्यु को सुखद बना देती है । राम जी की मर्यादायें अनुकरणीय है और श्री कृष्ण जी की लीलाये अनुशरणयीय हैं ।
योग स्वयंम् को उस परमात्मा से जोड़ लेने की साधना है । ये शरीर को ही नहीं बल्कि अंतःकरण को पुष्ट करने की वैज्ञानिक विधि है । यह बात पण्डाल मे पधारे पद्मश्री यौगाचर्य श्री भारत भूषण जी समझाते हुए बताया कि योग ही एक मात्र साधन है जिससे संस्कार और संस्कृति दोनोें का विकास सम्भव है । भागीरथ प्रसंग मे जय प्रकाश शर्मा याज्ञिक जी ने बताया कि मोक्ष दायिनी गंगा जी भारत वर्ष की आत्मा है । गंगा जी की स्वच्छता और निर्मलता ही इस देश की उज्ज्वलता का मापदंड है। गंगाजी सहित सभी प्राण दायिनी नदियों को मैली होने से बचाना है ।
आज कथा पण्डाल मे सहारनपुर से पधारे संजय त्यागी, सुशांत सिंघल के अलवा श्री सुरेश चंद शर्मा सतीश चंद शर्मा पवन नागर ,मेयर आशु वर्मा, दिवाकर मिश्र, लोकेश शर्मा लोकेँद्र शर्मा, राजेश तिवारी, मनोज पंत, आदेश शर्मा, अनिल शर्मा आदि उपस्थित रहे । सैकड़ो श्रोताओं से भरे पण्डाल मे भक्ति पूर्ण भजनों की स्वर लहरी में सब सराबोर हो गये।



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