बसुंधरा, ( प्रमुख संवाददाता ) मेवाड़ संस्थान में चीन और उसकी चुनौतियां विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन को बचाने के लिए डोकलाम मामले में चीन को भारत के साथ तात्कालिक समझौता करना पड़ा है। ब्रिक्स सम्मेलन के बाद चीन क्या रणनीति अपनाता है, यह देखना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर वर्ष 1962 के युद्ध से भारत ने सबक लिया होता तो चीन के साथ सीमा विवाद की समस्या इतनी विकट नहीं होती। उन्होंने बताया कि पिछले 40 सालों में भारत ने विश्वभर में अपनी आध्यात्मिक, वैचारिक और तत्वज्ञान की शक्ति का विस्तार किया है तो चीन ने इंजीनियरिंग कौशल व सैन्य शक्ति बढ़ाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने चीन के इतिहास-भूगोल पर विस्तार से प्रकाश डाला। लोगों के सवालों का जवाब देते हुए उन्हांेने बताया कि चीन में कम्युनिस्ट सरकार है इसलिए चीन विश्व में महाशक्तिशाली हो रहा है, जिस दिन वहां कम्युनिज्म खत्म हुआ, चीन लड़खड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि चीन ने अभी तक केवल दो यु़द्धों को छोड़कर किसी भी देश से लम्बी लड़ाई नहीं लड़ी है। एक कोरिया और दूसरा वियतनाम। उन्होंने बताया कि चीन ने पिछले 40 सालों में डिफेंस इंडस्ट्री खड़ी करने पर ज्यादा ध्यान दिया जबकि हम इंडस्ट्री खड़ी करके जीवन की जरूरी चीजों को बनाने में ही लगे रहे। हमने वाशिंग मशीन बनाना प्राथमिकता समझा, जबकि चीन ने सबसे पहले हथियार बनाने में कामयाबी हासिल की।
मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि हमने तिब्बत को चीन का हिस्सा माना, यही हमारी सबसे बड़ी भूल रही। हम तिब्बत को तो चीन का हिस्सा मानते रहे जबकि तिब्बतियों को भारत में शरण दिये हुए हैं। अगर भारत शुरू से ही तिब्बत पर अपनी दावेदारी मजबूत किये रहता तो चीन से सीमा विवाद नहीं बढ़ता। उन्होंने कहा कि चीन भारत को चारों तरफ से घेरने में लगा हुआ है। चीन की इस चाल को समझना होगा और ज्यादा सजग होना होगा। उन्होंने कहा कि चीन का आम नागरिक नहीं चाहता कि भारत-चीन में युद्ध हो लेकिन चीन के नेता चाहते हैं कि युद्ध हो। डाॅ. गदिया ने बताया कि हम चीन से 16 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का आयात करते हैं जबकि निर्यात केवल 14 लाख करोड़ के आसपास है। हम चीन का सामान अपने यहां ज्यादा ला रहे हैं, अपना सामान वहां कम भेज रहे हैं। इससे हमारी पाॅवर काॅस्ट असंतुलित हो रही है। इसे ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चमत्कार करने से ज्यादा हमें पुरुषार्थ पर ध्यान देना होगा। हमें अपने सोच के दायरे को बढ़ाना होगा, उससे बाहर निकलना होगा, तभी भारत चीन जैसी महाशक्ति को नेस्तनाबूद कर सकता है।
इससे पूर्व विचार संगोष्ठी में चेयरमैन डाॅ. गदिया ने बनवारी जी को इंस्टीट्यूशंस की ओर से शाॅल व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी का संचालन अमित पाराशर ने किया।



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