बाबरी विध्वंस और मुस्लिम-विरोधी दंगों के ज़िम्मेदारों को तुरंत सज़ा देने की मांग की Demanded immediate punishment for the Babri demolition and anti-Muslim riots



केवाईएस ने 6 दिसम्बर को साम्प्रदायिकता-विरोधी दिवस मनाते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पर किया कार्यक्रम का आयोजन


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) और अन्य प्रगतिशील, जनतांत्रिक संगठनों ने मिलकर आज, 6 दिसम्बर को साम्प्रदायिकता विरोधी दिवस के रूप में मनाते हुए दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया| जहाँ दिल्ली प्रदेश के तमाम जनवादी संगठनों के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों से आये कई संगठनो के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया| ज्ञात हो कि 6 दिसम्बर 1992, का दिन इतिहास का वह काला दिन है जिस दिन न केवल बाबरी मस्जिद का ध्वंस हुआ था बल्कि देश के दो बड़े सम्प्रदायों के बीच सांप्रदायिक उन्माद व तनाव भी पैदा किया गया था| यह स्पष्ट है कि भाजपा का संप्रदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं पर यह हमला चुनावों में राजनीतिक ध्रुवीकरण करके सत्ता हासिल करने के लिए किया गया था| लेकिन आज बाबरी-ध्वंस के पूरे 25 सालों बाद भी सांप्रदायिक उन्माद का यह सिलसिला अभी तक थमा नहीं बल्कि बढ़ा ही है|

साम्प्रदायिकता की ऐसी घटनाएँ आज रोज-रोज सुनने में आती हैं और भाजपा के पिछले 3-4 वर्षों के शासनकाल में तो यह और भी तेज़ी से बढ़ी हैं| हाल-फिलहाल के वर्षों में हुई घटनाओं को देखें तो चाहे वह मुजफ्फरनगर, दादरी अथवा अलवर की घटना हो, या फिर जे.एन.यू में नजीब के साथ मारपीट और उसके लापता हो जाने का मामला हो, या जुनैद और पहलू खान की हत्या हो, या फिर देश की चर्चों-मस्जिदों  पर हुए हमले हों इन सबके पीछे भाजपा, आरएसएस, एबीवीपी या इन जैसे दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों का ही हाथ रहा है| कभी गौ-रक्षा के नाम पर देश के अलग-अलग ईलाकों में गौ-रक्षकों द्वारा किसी सम्प्रदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाया जाता है, तो कभी लव-जेहाद के नाम पर इनके द्वारा न केवल प्रेमी-युगलों को परेशान किया जाता है बल्कि इसे हर तरीके से सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास भी किया जाता रहा है| यह भाजपा समर्थित दक्षिणपंथी, अराजक, फासीवादी संगठन गौ-रक्षा, लव-जेहाद, राम मंदिर, राम म्यूजियम, हिन्दू राष्ट्र के नाम पर आज देश सांप्रदायिक आधार पर बांटने में लगे हुए हैं ताकि देश की जनता सरकार से भुखमरी, बीमारी, बेचारी, गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी पर सवाल न पूछे और आपस में संप्रदाय के नाम पर बँटी रहे|

क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) व मौजूद सभी संगठनों ने बाबरी विध्वंस और मुस्लिम-विरोधी दंगों के ज़िम्मेदारों  को तुरंत सज़ा देने की मांग की| साथ ही दंगों में लिप्त सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भी पकड़ कर उन पर कारवाई की मांग की और यह संकल्प भी लिया कि वह देश में बढ़ रही साम्प्रदायिकता को रोकने का काम करेंगे और देश में साम्प्रदायिकता का माहौल पैदा करने वाले भाजपा, आरएसएस, एबीवीपी जैसे दक्षिणपंथी संगठनों का पर्दाफाश कर, उनकी असलियत जनता के बीच में लायेंगे|        



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