- दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉरेस्पोंडेंस स्टूडेंट्स के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का कार्यक्रम जश्न के साथ मनाया गया
- सावित्रीबाई फुले को उनकी पुण्यतिथि पर महिला आन्दोलन में उनके योगदान के लिए याद किया गया
- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कॉरेस्पोंडेंस स्टूडेंट्स ने यौन हिंसा और शिक्षा में गैरबराबरी के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया
ज्ञात हो कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था| संघर्षशील महिला केंद्र (सी.एस.डब्ल्यू) के कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में अपनी हिस्सेदारी निभाई| सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक, गीत और भाषण प्रतियोगिता का मंचन किया गया| इसके साथ-साथ एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसके द्वारा महिला आन्दोलन के संघर्षों और सफलताओं के इतिहास को आम छात्र-छात्राओं तक पहुचाने की कोशिश की गयी| प्रख्यात महिला-अधिकार कार्यकर्त्ता, डॉ. माया जॉन ने छात्राओं के बीच समाज में महिलाओं के साथ होने वाली समस्याओं पर बात रखी| कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने अपने अनुभवों से जैसे स्टडी सेंटर में शिक्षकों-गार्डों द्वारा छात्राओं से किये गए दुर्व्यवहार, गार्डों द्वारा प्रशासन के कहने पर स्टडी सेंटर को लॉक कर देने और कैंपस में छेड़छाड़ जैसी घटनाओं के बारे में आम छात्राओं को अवगत कराया| छात्राओं ने पिछले दिनों मिरांडा हाउस प्रशासन द्वारा जारी महिला-विरोधी नोटिस का भी उल्लेख किया, जहाँ एसओएल छात्राओं और केवाईएस के आन्दोलन के कारण प्रशासन को नोटिस हटाना पड़ा|
ज्ञात हो कि क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) लगातार कॉरेस्पोंडेंस स्टूडेंट्स के बीच में सक्रिय रहा है और कॉरेस्पोंडेंस स्टूडेंट्स के साथ हो रहे गैरबराबरी के खिलाफ निरंतर संघर्ष करता रहा है| केवाईएस ने एसओएल छात्राओं के साथ बढ़ते यौन हिंसा के खिलाफ विश्वविद्यालय में आन्दोलन छेड़ा था| इस बात को ध्यान में रखते हुए कि एसओएल में 2,50000 लाख छात्राएं पढ़ती हैं, केवाईएस ने यह निश्चय किया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस वंचित परिवारों से आने वाली इन छात्राओं के बीच मनाया जाये| ज्ञात हो कि कॉरेस्पोंडेंस स्टूडेंट्स के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम इसलिए किया गया क्योंकि एसओएल स्टूडेंट्स के बीच में कभी कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं किया जाता है और एसओएल स्टूडेंट्स को दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उपेक्षा का ही शिकार होना पड़ता है|





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