मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर किया विरोध प्रदर्शन Manipur University students protest on Human Resource Development




  • मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को तुरंत बर्खास्त करने की माँग उठाई
  • दिल्ली पुलिस ने बर्बरतापूर्वक छात्रों को  डिटेन किया
  • गंभीर आरोपों के बावजूद अपने पद पर बने रहने के खिलाफ छात्रों ने उठाई आवाज़
  • कुलपति को तुरंत बर्खास्त करने को लेकर आम छात्र-जन के हस्ताक्षर और ज्ञापन मानव संसाधन विकास मंत्री को सौंपा


नई दिल्ली, ( सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो )  नार्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (नेफिस) और कांगलापाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (के.एस.ए) कार्यकर्ताओं ने आज मणिपुर एवं अन्य राज्यों के छात्रों और अन्य संगठनों के साथ मिलकर केंद्र मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एम.एच.आर.डी) के खिलाफ विशाल प्रदर्शन किया| इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र-प्रतिनिधियों ने भी हिस्सेदारी निभाई| प्रदर्शन कर रहे छात्र मणिपुर विश्वविद्यालय कुलपति, श्री श्री अद्या प्रसाद पांडे को बर्खास्त करने की माँग कर रहे थे, और इस मुद्दे को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री, श्री प्रकाश जावड़ेकर से मिलना चाहते थे| परन्तु, दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें बर्बरतापूर्वक हिरासत में लेकर, संसद मार्ग पुलिस थाने में डिटेन किया गया| 

इस प्रेस कथन के लिखे जाने तक छात्र थाने में ही थे| पुलिसिया दमन यह साफ़ तौर पर प्रदर्शित करता है केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर रवैया उदासीन है और उसका विश्वविद्यालय का अकादमिक वातावरण नष्ट करने में कुलपति के साथ गठजोड़ है|

ज्ञात हो कि पिछले 2 महीनों से मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी हड़ताल पर हैं और विश्वविद्यालय कुलपति, को बर्खास्त करने की माँग कर रहे हैं| यह माँग कुलपति के कार्यालय द्वारा की गयी अनियमित्ताओं को लेकर की जा रही है| दो महीने से जारी हड़ताल के पीछे कुलपति का अपने पद पर बने रहना कारण है और इस वजह से विश्वविद्यालय का कार्य ठप्प है और छात्रों का भविष्य अधर में है| इस मामले में एम.एच.आर.डी का भी उदासीन रवैया साफ़ ज़ाहिर होता है, जिसने कुलपति के खिलाफ जांच बिठाने के बावजूद, उनको पद पर बने रहने दिया है| छात्रों एवं नेफिस और के.एस.ए कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपनी मांगों के साथ एक ज्ञापन और आम छात्र-जनता के हस्ताक्षर सौंपने वाला था|

ज्ञात हो कि मणिपुर विश्वविद्यालय कुलपति पर भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण व्यवहार, प्रशासन में अनियमित्ता, अकादमिक माहौल को खत्म करने और  गबन के गंभीर आरोप हैं| उनके कार्यालय द्वारा गैर-कानूनी रूप से छात्र संगठन, एबीवीपी को चन्दा दिया गया| साथ ही, विश्वविद्यालय की एग्जीक्यूटिव कौंसिल और फाइनेंस कौंसिल के साथ बैठक न करना, कोर्ट मीटिंग की उपेंक्षा करना, गैर-कानूनी रूप से पदों को भरना और शिक्षकों के प्रमोशन को रोकना उनके ऊपर लगे आरोपों में शामिल हैं|

प्रदर्शन में शामिल छात्रों एवं कार्यकर्ताओं ने कुलपति को उनके पद पर बने रहने के खिलाफ आवाज़ उठायी| कुलपति के ऊपर लगे आरोर्पों पर जांच कमिटी बिठाए जाने के बावाजूद उनका पद पर बने रहने न सिर्फ़ निराशजनक है, बल्कि कुलपति द्वारा जांच को प्रभावित करने का रास्ता खोलता है| छात्रों ने माँग किया कि जांच पूरी होने तक उन्हें छुट्टी पर भेजकर पद से दूर रखा जाए| ज्ञात हो कि मणिपुर विश्वविद्यालय संकट के मुद्दे पर नेफिस और के.एस.ए ने मणिपुर एवं अन्य राज्यों में पिछले दिनों एक वृहद् हस्ताक्षर अभियान चलाया था, जिसमे मिले हस्ताक्षरों को एम.एच.आर.डी में सौंपा जाना था| नेफिस और के.एस.ए ने जल्द ही छात्रों की मांगें न माने-जाने की स्थिति में अपना आन्दोलन और तेज़ करने का ऐलान किया है|



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