आने वाले समय के लिए इतिहास बना रेल बजट, सिर्फ एक बजट पेश होगा - Rail budget and general budget will be amalgamated

 रेल बजट आने वाले समय के लिए इतिहास बन जाएगा और अगले साल से आम बजट में ही रेल बजट पेश होगा. यानि रेल बजट और आम बजट का विलय हो गया हैं. इन दो बजट की जगह  2017 से सिर्फ एक बजट ही पेश होगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज अलग से रेल बजट पेश करने की व्यवस्था समाप्त करने और इसे आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अबतक ऐसी परंपरा रही है कि रेल बजट पहले पेश होता था और उसके कुछ दिनों बाद आम बजट।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बाबत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अगले साल से सिर्फ एक बजट पेश होगा। अगले साल यानी 2017 से रेल बजट का आम बजट में विलय होगा। 1924 से रेल बजट अलग से पेश होता था। उन्होंने कहा कि रेल बजट को अलग से पेश करने की जरूरत नहीं है। ऐसा होने के बावजूद रेलवे की अलग पहचान बरकरार रहेगी।

जेटली ने कहा कि सरकार के इस फैसले से रेलवे को मिलनेवाली मदद में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि देबराय कमेटी की सिफारिशें सरकार ने मानी और ऐसा करने का फैसला किया। नीति आयोग कमेटी ने दोनों बजट (रेल और आम बजट) के विलय की सिफारिश की थी। सरकारी आय, व्यय और निवेश के प्रस्ताव रखने और पारित करने के मामले में एक बड़े बदलाव वाले निर्णय के तहत मंत्रिमंडल ने सालाना आम बजट फरवरी के अंत की परंपरागत तारीख से एक महीने पहले पेश किये जाने के वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी। इसके साथ ही रेलवे का बजट अलग से पेश करने की नौ दशक से भी अधिक पुरानी परंपरा को भी समाप्त कर उसे आम बजट का हिस्सा बनाने का भी निर्णय किया गया है।

इन फैसलों के तहत अब बजट को सरल बनाने और कामकाज की सुगमता के लिए सरकारी खर्चे को योजना एवं गैर-योजना व्यय में वर्गीकृत करने की व्यवस्था समाप्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने आम बजट को फरवरी के बजाए एक महीने पहले पेश करने के प्रस्ताव के मंजूरी दे दी। अबतक बजट को फरवरी के आखिरी कार्यदिवस को पेश किया जाता रहा है। सरकार चाहती है कि पहली अप्रैल से शुरू होने वाले नये वित्त वर्ष से पहले ही उसकी सालाना आय और व्यय के प्रस्तावों को संसद की मंजूरी मिल जाए। बजट सत्र को पहले शुरू करने से इसके लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। मंत्रिमंडल ने रेल बजट को आम बजट में मिलाने को भी मंजूरी दे दी है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही इसके पक्ष में बोल चुके हैं।

अबतक बजट को संसद की मंजूरी मई के मध्य तक दो चरणों में मिलती थी। मानसून जून में आने के साथ राज्य अधिकतर योजनाओं का क्रियान्वयन एवं खर्च अक्तूबर तक शुरू नहीं हो पाते थे। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये छह महीने का ही समय बचता था। बजट को पहले से पेश किये जाने का मतलब है कि पूरी प्रक्रिया 31 मार्च तक संपन्न हो जाएगी और व्यय के साथ-साथ कर प्रस्ताव नये वित्त वर्ष की शुरूआत से ही अमल में आ जाएगा। इससे बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा। इसके साथ ही रेलवे के लिये अलग से बजट पेश किये जाने की 92 साल पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है और इससे संबंधित प्रस्ताव आम बजट का हिस्सा होगा। सरकार का यह मानना है कि कुल व्यय चाहे वह योजना हो या गैर-योजना, लोगों के लिये मूल्य का सृजन करता है। पहली बार योजना व्यय अलग से 1959-60 के बजट में पेश किया गया
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