संपादकीय
उरी घटना ने पूरे हिन्दोस्तान के आवाम में एक गुस्सा की चिंगारी भर दिया है । लोग भी कई तरह से पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं, और यह होना भी चाहिए । क्योंकि कुत्ते की दुम कई वर्षो तक पत्थर से दबाने के बाद भी जब पत्थर अलग किया जाता है तो वह टेढी की टेढी ही होती है । यह भी कुत्ते की दुम के तरह ही है । अब हमारे देश के हुक्मरानों को इसे उखाड़ फेंकना ही होगा । इसे एक बार फिर 1971 जैसा सबक देना ही होगा क्योंकि सिर्फ युद्ध ही कोई हल नहीं है । उस समय ‘ आयरन लेडी ’ के रूप में प्रसिद्ध इंदिरा गांधी ने 1970 में इसके खिलाफ रणनीतिक चाल चलकर पाकिस्तान के दो टुकड़े करा दी जिसे लेकर आज तक उसकी हालत ‘ कोढ़ मे खाज ’ की हो गई है । हमारे हुक्मरानों को एक बाहरी आक्रमण के साथ ही 1971 जैसी घटना को एक बार फिर दोहराना होगा । हमें सिर्फ युद्ध की भाषा ही नहीं बोलनी है बल्कि अपनी सुरक्षा तंत्र भी चाकचैबंद्ध करनी होगी । याद करे अमेरिका में हवाई हमला के बाद कोई भी दूसरी आतंकी कार्रवाई करने की आतकवादियों की हिम्मत नहीं हो सकी । इसका मुख्य कारण वहां की सुरक्षा तंत्र की मजबूती है । हमें भी अमेरिका से यह सीखना चाहिए कि पहले किस तरह हम अपनी आंतरिक व बाहरी सुरक्षा को मजबूत करें , ताकि कोई भी चुक नजर न आए । देश को नुकसान पहुचाने वाले यहां कि पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एक कदम भी आगे न बढ़ा पाएं । हमें दोनों स्तर पर अपने वे पड़ोसी देशों से सावधान होना होगा, जो हर स्तर पर हमें नुकसान पहुंचाने की सोचते रहते हैं । हमारे देश के हुक्कमरानों का सबसे बड़ा काम होगा दुनिया के सभी देशों से पाकिस्तान को अलग - थलग कर देना । हालांकि जर्मनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘ भारत को पाक के खिलाफ कार्रवाई का पूरा अधिकार है । उधर संयुक्त राष्ट्र के पांच मे से दो स्थायी सदस्यों फ्रांस और रूस ने कहा, ‘ अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करते हुए भारत को पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई करनी चाहिए । ’ भारत हर स्तर पर पाकिस्तान क्या अन्य दूसरे मुल्क को भी सबक दे सकता है और एक बार फिर हमें यह सिद्ध करना ही होगा । याद करे 30 जनवरी 1970 को जब श्रीनगर हवाई अड्डे से भारतीय विमान को अगवा कर के 2 फरवरी को लाहौर में फूंक डाला गया था, तब उस समय इंदिरा गंाधी ने 4 फरवरी को पाकिस्तान के सैनिक व नागरिक विमानों के भारत के उपर से उड़ान भरकर पूर्वी पाकिस्तान ( अब बंग्लादेश ) जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था । पाकिस्तान की इस फैसले से रीढ़ टूट गई थी । हमे अब बंग्लादेश के तरह ही बालुचिस्तान को भी आजाद कराने के लिए नई मुहिम छेड़नी होगी । जब तक पाकिस्तान को उसके आंतरिक मामलों में गले तक फांस नहीं दिया जायेगा तब तक वह अपनी दोगलापन से बाज नहीं आयेगा । नजायज औलाद पाकिस्तान हमेसा से ही भारत को अशांत करने की योजना बनाता रहता है । यह 1947 की हमारी गलती की खामियाजा का परिणाम है की 100 करोड़ रूपए हमसे लेकर आज उसी से हम पर आतंक जमा रहा है । खैर यह तो तय है कि उसे इसका परिणाम भी भुगतना ही पडेगा । लेकिन आवाम को गुस्सा होना जायज भी है क्योंकि ' हम ज्यों - ज्यों नवते जाते हैं, वह त्यों - त्यों धाक जमाता है ’ जैसे पहल को छोड़ कर एक बार रणनीतिक शैली और मजबूत इरादों के साथ हमें आगे आकर विश्व को दिखाना होगा कि हम सिर्फ शांति के पूजारी ही नहीं अपनी अस्मिता, आन- बान, शान के लिए मर मिटना भी जानते हैं । डा. राजेश्वर उनियाल की पंक्तियों से यह दर्शाना चाहता हूं -
”बहुत उड़ा चुके शांति के कबूतर
अब चलो कुछ हथगोले बनाएं
बात करता है पड़ोसी जिसमें
उसे उसी भाषा में समझाएं
नहीं हौंसले ये टूटेंगे
नहीं बर्बाद यों होंगे
अगर वो रात फिर आई
तो सरहदें हम बदल देंगे।”
संजय त्रिपाठी, संपादक



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