| नरेंद्र कुमार शर्मा |
सम्पूर्ण विश्व में तम्बाकू सेवन को रोकने के लिए लोगो को जागरूक बनाने के लिए विश्वस्वास्थ संगठन (डब्लू.एच.ओ) ने 7 अप्रैल 1988 अपनी वर्ष गांठ के अवसर पर विश्व तम्बाकू निषेध दिवस की शुरूआत की उसके बाद से यह प्रतिवर्ष 31 मई को आयोजित होने लगा। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को तम्बाकू एवं धूम्रपान के हानिकारक प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना था। क्योंकि अधिकांश लोग तम्बाकू या धूम्रपान के विषाक्त प्रभावों से अनभिज्ञ हैं। तम्बाकू में उपस्थित एक रसायन निकोटीन बहुत हानिकारक है तथा यह सीधा मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और मस्तिष्क के डोपमाइन पथ को रोक देता है। जिससे मस्तिष्क में अवांछनीय सूचनाओं का संचार होने लगता हैं। इस दिवस को मनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम किये जा सकते हैं इनमे सार्वजनिक मार्च, प्रदर्शनी कार्यक्रम, बड़े बैनर, शिक्षण संस्थाओं द्वारा अभिमान, धूम्रपानरोधी रैली सीधा संवाद, लोक कला, स्वास्थ शिविर, तम्बाकू को प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाना तथा लागू करना चाहिए।
मुख्य रूप से तम्बाकू से होने वाली हानियां निम्र प्रकार से देखी जा सकती हैं-
1. तम्बाकू से श्वसन तंत्र मेंतेजी से नकारात्मक बदलाव आते हैं। जिस कारण दमा तथा फेफड़ो के क्षय रोग एवं कैंसर की संभवाना बढ़ती है। धूम्रपान करने से फेफड़ो के कैंसर की संभावना 30 प्रतिशत अधिक हो जाती है।
2. तम्बाकू सेवन करने से उपापचय क्रिया गड़बड़ा जाती है। जिसके मधुमेह होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। तथा शरीर में लगे घाव देर से भरते है।
3. कुछ वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि धूम्रपान करने वाले नर नारियां की प्रजनन क्षमता पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। धूम्रपान करने वाली गर्भवती स्त्री की सन्तान को भी धूम्रपान हानि पहुंचाता हैं।
4. मनोवैज्ञानिक शोधों के अनुसार ‘‘धूम्रपान’’ करने वाले व्यक्ति मानसिक अवसाद एवं भुलक्कड़ पन की बीमारी से अधिकांश रूप से ग्रसित होते हैं।
5. तम्बाकू सेवन (किसी भी रूप में) करने वाले लोगों में नेत्र विकार तेजी से बढ़ते हैं। उन्हे भांति के नेत्र रोगो से पीडि़त होना पड़ता है।
6. धूम्रपान करने वाले लोगों को असमय वृद्धावस्था आने लगती हैं। उनकी चेहरा कान्तिहीन हो जाता है। तथा चेहरे पर झुर्रिया जल्दी आ जाती हैं
7. धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को संधिशोथ (जोड़ो में दर्द) तथा अर्थराइटिस (गठिया बात) का खतरा अन्य लोगो की अपेक्षा अधिक होता हैं। क्योंकि निकोटिन तथा कार्बन मोनो ओक्साइड श्वास के साथ जाकर रक्त में घुल जाते हैं। और इन रोगों को जन्म देते हैं।
8. निकोटीन पदार्थ के रक्त में घुलने के कारण धमनियां कठोर हो जाती हैं। जिसके भयानक हृदय रोग धूम्रपान करने वालों को घेर लेते हैं।
9. अक्रिय धूम्रपान अधिक हानिकारक होता है क्योंकि कम आयु के बालकों के फेफड़े अति संवेदन शील होते हैं और धूम्रपान न करने वालो को भी यदि निवशतापूर्ण धूम्रपान करना पड़े तो उनके श्वसन तंत्र पर कही ज्यादा अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है।
10 धूम्रपान करने वाले लोग प्राय: चिढचिढे स्वभाव के होते हैं क्योंकि तम्बाकू सेवन से मानसिक स्वास्थ संतुलित नहीं रहता।
धूम्रपान एक सामाजिक, आर्थिक तथा नैतिक बुराई है। इससे दूर भी रहा जा सकता है अर्थात धूम्रपान से बचाव ही एक मात्र विकल्प है। धूम्रपान से बचने के लिए निम्र प्रयास करने चाहिए।
1. धूम्रपान त्यागने के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति का होना अनिवार्य है।
2. योजना बनाकर धूम्रपान को छोड़ा जा सकता है।
3. व्यायाम की दर बढ़ाकर धूम्रपान को रोका जा सकता है।
4. धूम्रपान छोडऩे पर स्वयं को पुरस्कृत एवं न छोडऩे पर दण्डित करने सो भी धूम्रपान से बचा जा सकता है।
5 फल दूध व हरी सब्जियों के सेवन करने से भी धूम्रपान करने की इच्छा में कमी आती है।
6. मादक द्रव (शराब) एवं शीतल पेय (कोको कोला, लिमका, थम्सअप, आदि) कम से कम ले तो धूम्रपान से बचा जा सकता है।
7. तनाव मुक्त रहने का प्रयास करे, हास्य शिविर में भागीदारी करें संगीत सुनकर भी तनाव मुक्त रहा जा सकता है। तनाव मुक्त रहने से धूम्रपान की इच्छा नहीं होती है।
8. विटामिन सी का भरपूर उपयोग करें। नीबू का प्रयोग बहुत सफलता दायक है।
9. नान स्मोकर्स को मित्र बनायें, और स्वयं पर भरोसा करें।
10. दाल चीनी, मुलैठी, भुनी सौफ तथा मेवो के प्रयोग करने से धूम्रपान की इच्छा कम हो जाती है।
और अन्त में .............. हम सभी किसी न किसी प्रकार से परिवार से समाज से जुड़े होते हैं। कोई संस्था धूम्रपान करने के लिए प्रोत्साहित नही करेगी अपितु इससे दूर रहने के लिए ही प्रयास करती है, तो धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को सम्मानित दृष्टि से नही देखा जाता। स्वयं धूम्रपान करना तो हानिकारक है ही उससे ज्यादा अक्रिय धूम्रपान हानिकारक हैं। जिन बच्चों को हम गोद खिलाते है जिस परिजनों के अतिनिकट रहने की हमे अवसर मिला है कम से कम उनके स्वास्थय प्रति हमें अवश्य चिन्तित होना चाहिए। आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर हम यदि स्वयं धूम्रसेवी है तो धूम्रपान छोडऩे का संकल्प ले, और यदि नहीं है तो किसी धूम्रसेवी का धूम्रपान छुड़वाने का संकल्प ले, तो यह दिवस सार्थक सिद्ध हो सकेगा।
नरेंद्र कुमार शर्मा
राष्ट्र पुरस्कृत शिक्षक



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