मानव अधिकार कार्यकर्ता की सुरक्षा हटाने पर जिला प्रशासन आयोग में तलब Calling the District Administration Commission on the removal of the safety of human rights activists



साहिबाबाद, ( प्रमुख संवाददाता )  राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने साहिबाबाद निवासी एक मानव अधिकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता की सरकारी सुरक्षा हटा लेने पर गाजियाबाद के जिलाधिकारी एवं  एसएसपी को आयोग में तलब कर 1 सप्ताह में जवाब देने को कहा है। आयोग ने जवाब मांगा है कि जब कार्यकर्ता की जान को खतरा है तो उसकी सुरक्षा क्यों हटाई गई? इसके अलावा इसी मामले से जुड़े एक अग्निकांड में मारे गये तेरह लोगों को दिए गए मुआवजे के प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।
        
गौरतलब है कि गाजियाबाद जिले में चल रहे प्रदूषणकारी कारखानों के खिलाफ साहिबाबाद निवासी आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता राजीव कुमार शर्मा ने आवाज उठायी थी तथा इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर इन कारखानों को जिला प्रशासन द्वारा सील करना पड़ा था। इनके ज्यादर कारखाने दिल्ली से सटे शहीद नगर के कारखानों को भी सील किया गया था। इससे माफिया लोग कार्यकर्ता की जान का प्यासा हो गए। इसी दौरान शहीद नगर में एक जींस फैक्ट्री में हुए अग्निकांड में तेरह लोगों की जान चली गयी। यह मामला भी राजीव शर्मा मानवाधिकार में ले गये। शहीद नगर और उसके आसपास प्रदूषणकारी उद्योग बंद होने से नाराज माफिया किस्म के लोग राजीव शर्मा से खफा हो गये। शहीद नगर के अलावा फरुखनगर में 5 लोगों के एक पटाखे के कारखाने में मारे जाने का मामला भी राजीव कुमार शर्मा ने आयोग में उठाया। एक के बाद दूसरी कार्रवाई से नाराज माफिया जब राजीव शर्मा की जान का प्यासा हो गया तो उन्हें रातों रात अपना घर छोड़ कर 5किमी दूर दूसरे स्थान पर किराये का मकान लेकर रहना पड़ गया। 
      
मामले की गंभीरता को लेकर आयोग ने गाजियाबाद के जिला प्रशासन को मानवाधिकार कार्यकर्ता को सरकारी सुरक्षा गार्ड देने का हुक्म दिया और आदेश के पालन में कार्यकर्ता को 3 मार्च 17 को सुरक्षा दे दी गयी। लेकिन 4 मई 2017 को फिर सुरक्षा हटा ली गई। राजीव कुमार शर्मा सुरक्षा के  इस मामले को फिर आयोग ले गये जिसमें आयोग के निर्देश पर जिला प्रशासन ने 12 जुलाई 2017 को पुनः सुरक्षा प्रदान कर दी। लेकिन 6 महीने ही बीते थे कि 22 फरवरी 2018 को यह कहकर सुरक्षाकर्मी हटा लिया गया कि अगर उन्हें सुरक्षाकर्मी चाहिए तो अपने  खर्चे पर ले लें।

राजीव कुमार शर्मा अपनी जान की सुरक्षा को लेकर 9 मार्च को आयोग के सामने प्रस्तुत हुए और उन्होंने अपनी जान को बराबर खतरा बताया। उनका कहना था माफियाओं के कारण उन्होंने अपना शहीद नगर का मकान छोड़ दिया है और वह दूसरी कालोनी में किराए पर रह रहे हैं। उनको बच्चों को पढ़ाना और किराए पर रहना ही मुश्किल हो रहा है तब ऐसे में अपनी जेब से अपने लिये सुरक्षाकर्मी लेने की उनकी हैसियत कैसे हो सकती है। 
       
आयोग ने सुरक्षा के इस मामले की गंभीरता को लेकर जिलाधिकारी और एसएसपी गाजियाबाद को पत्र लिख कर जवाब मांगा है कि राजीव कुमार शर्मा की सुरक्षा क्यों हटाई गई, इसके अलावा फैक्ट्री में मारे गये लोगों को प्रशासन के अनुसार दो लाख रूपया देने की जो बात कही है उसके प्रमाण लेकर आयें। 
आपको बतादें कि राजीवकुमार शर्मा अब तक करीब 755 मामले आयोग में उठा चुके हैं तथा करीब 2 करोड ़55 लाख रूपया मुआवजा पीड़ितों को दिला चुके हैं।



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