गोपालगंज संसदीय क्षेत्र: लोकसभा चुनाव 2019
यहां हर बार नये चेहरे को मिलती है तरजीह, 2009 में हुआ एससी वर्ग के लिए यह सीट सुरक्षित
गोपालगंज, ( संजय त्रिपाठी ) लोकसभा 2019 में भी गोपालगंज संसदीय क्षेत्र का चुनावी दंगल अपने पूरे जोर पर है। 20 अप्रैल को जदयू प्रत्याशी डाॅ0 आलोक कुमार सुमन ने भारी जोरशोर के बीच अपना नामांकन किया। 22 अप्रैल को गठबंधन उम्मीदवार सुरेन्द्र महान नामांकन कर रहे हैं। ऐसे में धीरे - धीरे यहां का चुनाव रोचकता की ओर बढ़ रहा हैं। 1957 से इस लोकसभा क्षेत्र में हर बार नए चेहरे को तरजीह मिला है। हालांकि 1962 से लेकर 1977 तक वह समय था जब यहां कांग्रेस के पं0 द्वारिका नाथ तिवारी लगातार चार बार सांसद रहे। इसके बाद 1980 से लकर अब तक यहां नए चेहरे बदलते रहे। इस बार के चुनाव में भी यहां से दो नए चेहरे मुख्य मुकाबले में हैं।
ब्राह्मण बहुल्य गोपालगंज 1976 में सारण से अलग होकर जिला बना। 1977 से यहां के वोटर हर बार नए चेहरे को चुने। इससे पूर्व 1957 में सबसे पहले यहां से डाॅ0 सैयद महमूद सांसद बने थे। उसके बाद 1962 में पं0 द्वारिका नाथ तिवारी यहां चुनकर संसद पहुंचे। वोटरों ने उन्हें चार बार यहां का प्रतिनिधित्व सौंपा था। उसके बाद 1980 से लेकर 2014 तक वोटरों ने 11 चेहरे बदले। 1980 में नगीना राय यहां से सांसद बने थे। उनका नाम आज भी यहां के लोग बहुत ही सम्मान से लेते हैं। कहां जाता है कि उन्होंने सभी वर्ग के लोगों के लिए काम किया। उसके बाद 1984 में यहां से काली प्रासाद पांण्डेय संसद पहुंचे, 1989 में राजमंगल मिश्र, 1991 में अब्दुल गफूर तथा 1996 में लाल बाबू यादव यहां से सांसद चुने गए थे। इसी तरह यहां के वोटरों ने एक बार फिर 1998 में अब्दूल गफूर को ही चुना, लेकिन एक साल बाद ही 1999 में रघुनाथ झा को लोगों ने तरजीह दी और उन्हें अपना सांसद बनाया। 1904 में यहां से साधु यादव चुनाव जीते लेकिन 2009 में यह संसदीय क्षेत्र एससी के लिए आरक्षित होने पर यहां से पूर्णमासी राम को वोटरों ने अपना सांसद चुना। 2014 के मोदी लहर में यहां से बसपा छोड़ कर भाजपा से जुड़े जनक राम को लोगों ने भारी अंतर से जीत दिलाया। इस बार भी मुख्य मुकाबले के दोनों चेहरे बसपा से ही जुड़े रहे है। हालांकि इस बार गठबंधन प्रत्याशी सुरेन्द्र महान जदयू प्रत्याशी डाॅ0 आलोक कुमार सुमन को कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे है। लेकिन डाॅ0 आलोक कुमार सुमन की मिलनसार छवि व सभी वर्गों में पकड़ उनकी लड़ाई को धारदार बना रहा है।
यहां विधानसभा सीटों की स्थिति का आकलन करें तो दोनों के बीच चुनावी मुकाबला और भी रोचक बन जाता है। गोपालगंज संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती है। इन 6 सीटों में से 2 पर बीजेपी, 2 पर जदयू काबिज है। जबकि इनमें से एक सीट पर आरजेडी तथा एक सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। अब फैसला 12 मई को हो पायेगा कि यहां की जनता किसे अपना सांसद चुनती है।
चुनावी आंकड़े एक नजर में -
कुल मतदाता - 18, 32, 200
पुरूष वोटर - 9,36, 334
महिला वोटर - 8,95, 787
थर्ड जेंडर - 80
नए वोटर - 40,347
बूथों की संख्या - 1,906
विधानसभा क्षेत्र - 6
इस लोकसभा क्षेत्र में स्थानीए मुद्दे के जगह ज्यादा जातीय समीकरण हावी रहता हैं। यहां पर मुस्लिम, यादव के अलावा ब्राह्मण, राजपूत और भूमिहार जाति के वोटरों का हमेशा से ही दबदबा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के जनक राम ने कांग्रेस उम्मीदवार डाॅ0 ज्योति भारती को पराजीत कर जीत दर्ज किया था। मोदी लहर में जनक राम को 4 लाख 78 हजार वोट मिले थे, वहीं निकतम प्रतिद्वंदी डाॅ0 ज्योति भारती को 1 लाख 91 हजार 837 वोट मिला था, जबकि जेडीयू के अनिल कुमार को 1 लाख 419 वोट मिले थे। ़




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